इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्य छिपाकर बार-बार अनुकंपा नियुक्ति के लिए याचिका दायर करने वाले याची पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने हरिशंकर की याचिका पर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्य छिपाकर बार-बार अनुकंपा नियुक्ति के लिए याचिका दायर करने वाले याची पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने हरिशंकर की याचिका पर दिया।
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बुलंदशहर निवासी हरिशंकर के पिता की 2007 में सेवाकाल में मृत्य हो गई। याची ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसका दावा 2011 में खारिज कर दिया गया था और 2011 के आदेश को उसने चुनौती नहीं दी। 2011 के आदेश का खुलासा किए बिना याची ने 2016 में अपने दावे पर विचार के लिए दुबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याची ने 2017 में तथ्य छिपाकर एक और याचिका दायर की।
कोर्ट ने मामले पर पुनर्विचार के लिए वापस प्राधिकारी को भेज दिया। प्राधिकारी ने पुनर्विचार के बाद उसके दावे को 2023 में खारिज कर दिया। इस आदेश को याची ने फिर चुनौती दी। कोर्ट ने पाया कि याची ने 2011 के आदेश को फिर से चुनौती नहीं दी और बार-बार पुराने दावे को आगे बढ़ा रहा है। इस पर कोर्ट ने उसकी रिट याचिका खारिज करते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। ब्यूरो