मामले में हिंदू पक्ष की दलील है कि ज्ञानवापी परिसर के धार्मिक चरित्र के निर्धारण के लिए शिवलिंग के आसपास के क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे जरूरी है। एएसआई ने 24 जुलाई से दो नवंबर 2023 तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसमें शिवलिंग के आसपास के क्षेत्र (वजूखाना) को शामिल नहीं किया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित वजूखाने की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से सर्वे कराने की मांग को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान याची राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने पूरक हलफनामा दाखिल किया। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी।
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मामले में हिंदू पक्ष की दलील है कि ज्ञानवापी परिसर के धार्मिक चरित्र के निर्धारण के लिए शिवलिंग के आसपास के क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे जरूरी है। एएसआई ने 24 जुलाई से दो नवंबर 2023 तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसमें शिवलिंग के आसपास के क्षेत्र (वजूखाना) को शामिल नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शिवलिंग के वैज्ञानिक सर्वे संबंधी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है तो यह कोर्ट कैसे आदेश दे सकता है। याची अधिवक्ता के अनुसार राखी सिंह की याचिका शिवलिंग छोड़कर बाकी क्षेत्र के एएसआई से वैज्ञानिक सर्वे को लेकर है और लक्ष्मी देवी के प्रार्थना पत्र से अलग है। राखी सिंह की पुनरीक्षण याचिका में वजूखाने के सर्वे की मांग वाली अर्जी वाराणसी जिला जज की ओर से खारिज किए जाने को चुनौती दी गई है।
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वहीं, मुस्लिम पक्षकार की दलील है कि सुप्रीम कोर्ट की आरे से सर्वे पर रोक लगाए जाने के बाद किसी भी तरह के सर्वे का आदेश देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है। हाईकोर्ट ने राखी सिंह के अधिवक्ता को एएसआई सर्वे रिपोर्ट की कॉपी दाखिल करने के लिए कहा। अधिवक्ता ने कहा कि अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट दाखिल कर देंगे।