मंदिर पक्ष के अधिवक्ता ने कहा, 13 अगस्त 1998 को सुनवाई पर रोक लगी थी, जिसे बढ़ाया नहीं गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा, यदि केस की सुनवाई पर रोक लगी है और इसे बढ़ाया नहीं गया है तो छह माह बाद वह रोक स्वयं खत्म हो जाएगी। इसलिए अधीनस्थ अदालत ने सुनवाई करते हुए सच का पता लगाने के लिए सर्वे कराने का आदेश दिया है, जो पूरी तरह से सही है। मुकदमे के तार्किक निष्कर्ष के लिए एएसआई सर्वे जरूरी है। इसलिए उस पर लगी रोक हटाई जाए।
मुस्लिम पक्ष की अधीनस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सर्वे कराने के अधीनस्थ अदालत के आदेश पर रोक लगा रखी है, जो 31 दिसंबर तक जारी है और केस की सुनवाई रुकी हुई है। फिलहाल याचिका की अगली सुनवाई 28 नवंबर को दोपहर 12 बजे से होगी।