सेवायत की तरफ के अधिवक्ता ने आपत्ति की कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा तीन के तहत किसी भी पूजा स्थल की स्थिति में बदलाव पर रोक लगाती है। चारों तरफ 14 मंदिर हैं। कॉरिडोर से जिनकी स्थिति से छेड़छाड़ करने की कोशिश की जा रही है। ये मंदिर प्रसिद्ध गायक तानसेन के गुरु हरदास संप्रदाय के हैं।
सरकार इन मंदिरों को ध्वस्त करना चाहती है, जो गैर कानूनी है। इससे पहले सेवायतों की तरफ से अधिवक्ता संजय गोस्वामी ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की। कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया। उसी मुद्दे को लेकर दोबारा जनहित याचिका दायर की गई है। मंदिर गोस्वामियों की निजी संपत्ति है। पूजा और चढ़ावे पर उन्हीं का अधिकार है। सरकार कॉरिडोर के बहाने मंदिर पर आधिपत्य की कोशिश कर रही है।
प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व मुख्य स्थायी अधिवक्ता कुणाल रवि ने कहा कि सरकार कानून के तहत जनहित में आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा के लिए कॉरिडोर योजना शुरू की है। जिससे मंदिर पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को पूर्व में दाखिल याचिका पर विचार कर तय करने का आदेश दिया था।