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वृंदावन बांके बिहारी मंदिर : कॉरिडोर के नाम पर सरकार कुंज गली व दो मंदिरों के पौराणिक स्वरूप को बिगाड़ देगी

Mon, 30 Oct 2023 03:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मथुरा वृंदावन कॉरिडोर निर्माण मामले में सोमवार को बहस जारी रही। चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ अनंत कुमार शर्मा की जनहित याचिका पर कर रही सुनवाई कर रही है।
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श्री बांके बिहारी मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मथुरा स्थित बांके बिहारी मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा व सुरक्षा के लिए प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण मामले की सुनवाई जारी है। सुनवाई आज भी होगी। इसके पहले पक्षकारों की ओर से आरोप लगाया गया कि कॉरिडोर के नाम पर सरकार कुंज गली व दो मंदिरों के पौराणिक स्वरूप को देगी बिगाड़ देगी।

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अनंत कुमार शर्मा व अन्य कई याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। अधिवक्ता का कहना था कि बांके बिहारी मंदिर के आसपास पुरातत्व विभाग के संरक्षण वाले मंदिर हैं। कॉरिडोर योजना में जिन्हें ध्वस्त करने की कोशिश कर वृंदावन का मूल धार्मिक स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है।

इसकी अनुमति न दी जाए। इस पर कोर्ट ने कहा श्रद्धालुओं कि सुरक्षा व सुविधा के लिए कानून के तहत कार्रवाई में क्या दिक्कत है। क्या वे श्रीकृष्ण जन्म के समय की स्थिति कायम रखने की मांग कर रहे हैं। अतिक्रमण किया गया है। लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार कदम उठाएगी।

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सेवायत की तरफ के अधिवक्ता ने आपत्ति की कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा तीन के तहत किसी भी पूजा स्थल की स्थिति में बदलाव पर रोक लगाती है। चारों तरफ 14 मंदिर हैं। कॉरिडोर से जिनकी स्थिति से छेड़छाड़ करने की कोशिश की जा रही है। ये मंदिर प्रसिद्ध गायक तानसेन के गुरु हरदास संप्रदाय के हैं।

सरकार इन मंदिरों को ध्वस्त करना चाहती है, जो गैर कानूनी है। इससे पहले सेवायतों की तरफ से अधिवक्ता संजय गोस्वामी ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की। कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया। उसी मुद्दे को लेकर दोबारा जनहित याचिका दायर की गई है। मंदिर गोस्वामियों की निजी संपत्ति है। पूजा और चढ़ावे पर उन्हीं का अधिकार है। सरकार कॉरिडोर के बहाने मंदिर पर आधिपत्य की कोशिश कर रही है।
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प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व मुख्य स्थायी अधिवक्ता कुणाल रवि ने कहा कि सरकार कानून के तहत जनहित में आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा के लिए कॉरिडोर योजना शुरू की है। जिससे मंदिर पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को पूर्व में दाखिल याचिका पर विचार कर तय करने का आदेश दिया था।
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