2020 से चल रहा अध्ययन
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. पंकज गुप्ता, डॉ. एनएन गोपाल, डॉ. अमित सिंह व डॉ. राजीव गौतम सहित अन्य ने वर्ष 2020 में अध्ययन शुरू किया। इसके अलावा वर्ष 2025 में अध्ययन को न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया आइकॉन में प्रेजेंट किया गया। हालांकि, यह अध्ययन अभी कई अन्य मरीजों पर किया जाना है।
क्या है मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग
मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग अत्याधुनिक चिकित्सीय परीक्षण है। इसके तहत बीमारी (विशेषकर कैंसर) से प्रभावित कोशिकाओं या ऊतकों के भीतर मौजूद डीएनए, आरएनए और प्रोटीनों का विश्लेषण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बीमारी की सटीक वजहों का पता लगाना है।
चौथे चरण का ब्रेन ट्यूमर घातक होता है। जिसमें ऑपरेशन के बाद भी मरीज छह से डेढ़ साल के भीतर मरीज में दोबारा ट्यूमर बनने लगता है। कुछ गंभीर ट्यूमर के मरीज पांच से सात साल या फिर उससे अधिक समय तक जीवित रहते हैं। ऐसे में अगर ट्यूमर के बॉयाप्सी के साथ मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग कराई जाए तो राहत की संभावना ज्यादा रहती है। - डॉ. पंकज गुप्ता, न्यूरो सर्जन, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।