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Health : लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं गंभीर ब्रेन ट्यूमर के मरीज

Mon, 08 Jun 2026 01:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्ययन में पाया गया कि ब्रेन ट्यूमर के गंभीर मरीज ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं।
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कहीं आपको ब्रेन ट्यूमर तो नहीं? - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्ययन में पाया गया कि ब्रेन ट्यूमर के गंभीर मरीज ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग ने अपना अध्ययन फोर्थ स्टेज के 45 ब्रेन ट्यूमर के मरीजों पर किया। इनमें 20 पुरुष व 25 महिला मरीज थे।

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मरीजों की उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच रही। इन सभी मरीजों का ऑपरेशन करके ट्यूमर को निकाल दिया गया। इन सभी की बॉयोप्सी सहित मॉलीक्यूलर प्रोफाइलिंग कराई गई। फॉलोअप में मरीजों की सिटी स्कैन व एमआरआई जांच कराई गई। इन सभी में दो प्रकार का कैंसर पाया गया। इनमें 10 फीसदी मरीजों में आईडीएच म्यूटेंट टाइप ऑफ कैंसर और अन्य में आईडीएच वाइल्ड टाइप कैंसर पाया गया। वहीं, आईडीएच वाइल्ड टाइप मरीजों में पांच साल तक दोबारा ट्यूमर नहीं बना।

आईडीएच म्यूटेंट टाइप ऑफ कैंसर के मरीजों में छह महीने के बाद दोबारा ट्यूमर बनने लगा। ऐसे में आईडीएच वाइल्ड टाइप कैंसर के मरीजों के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना पाई गई। अध्ययन के अनुसार अगर ब्रेन ट्यूमर के दौरान मॉलीक्यूलर प्रोफाइलिंग कराई जाए तो ऑपरेशन के बाद मरीज में दोबारा ट्यूमर के विकसित होने का पता लगाया जा सकता है। इससे इलाज में मदद मिलती है।

 

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2020 से चल रहा अध्ययन

न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. पंकज गुप्ता, डॉ. एनएन गोपाल, डॉ. अमित सिंह व डॉ. राजीव गौतम सहित अन्य ने वर्ष 2020 में अध्ययन शुरू किया। इसके अलावा वर्ष 2025 में अध्ययन को न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया आइकॉन में प्रेजेंट किया गया। हालांकि, यह अध्ययन अभी कई अन्य मरीजों पर किया जाना है।

क्या है मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग

मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग अत्याधुनिक चिकित्सीय परीक्षण है। इसके तहत बीमारी (विशेषकर कैंसर) से प्रभावित कोशिकाओं या ऊतकों के भीतर मौजूद डीएनए, आरएनए और प्रोटीनों का विश्लेषण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बीमारी की सटीक वजहों का पता लगाना है।

चौथे चरण का ब्रेन ट्यूमर घातक होता है। जिसमें ऑपरेशन के बाद भी मरीज छह से डेढ़ साल के भीतर मरीज में दोबारा ट्यूमर बनने लगता है। कुछ गंभीर ट्यूमर के मरीज पांच से सात साल या फिर उससे अधिक समय तक जीवित रहते हैं। ऐसे में अगर ट्यूमर के बॉयाप्सी के साथ मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग कराई जाए तो राहत की संभावना ज्यादा रहती है। - डॉ. पंकज गुप्ता, न्यूरो सर्जन, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।
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