शिकायतकर्ता का दावा है कि 2015 से 2019 के बीच मुक्त विवि में संचालित सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के पूर्व ऑनलाइन जेनरेट किए गए चालान व उनके सापेक्ष प्रवेश लेने वाले शिक्षार्थियों का डाटा विश्वविद्यालय में उपलब्ध है। इनके मिलान से इस आर्थिक अपराध को सत्यापित किया जा सकता है। ऑनलाइन प्रक्रिया में छेड़छाड़ की कोई गुजाइश नहीं। क्योंकि, डाटा प्रतिवर्ष प्रदेश सरकार व यूजीसी के पोर्टल पर भी अपलोड किया जाता है।
वित्त विभाग ने नहीं लगाई कोई आपत्ति: परीक्षा नियंत्रक
परीक्षा नियंत्रक प्रो.जीके द्विवेदी ने आरोपाें को निराधार बताते हुए कहा कि वह फरवरी 2010 से अप्रैल 2018 तक परीक्षा नियंत्रक रहे और दोबारा सितंबर-2025 से इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनकी जिम्मेदारी अभ्यर्थियों की योग्यता देख उन्हें प्रवेश देने तक सीमित है। प्रवेश से प्राप्त होने वाली फीस व प्रवेश लेने वाले शिक्षार्थियों की संख्या के बारे में हर साल वित्त विभाग को जानकारी उपलब्ध करा दी जाती है। चालान रसीद सीधे वित्त विभाग को भेज दी जाती है। सबकुछ ऑनलाइन है। इस संबंध में वित्त विभाग से उन्हें कभी कोई आपत्ति नहीं मिली और न ही किसी तरह की ऑडिट आपत्ति आई।