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UPRTOU : प्रवेश के नाम पर 7.37 करोड़ की अनियमितता के आरोपों की जांच शुरू

Mon, 08 Jun 2026 01:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में प्रवेश के नाम पर तकरीबन 7.37 करोड़ की वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच के आदेश जारी किए गए हैं। मामला वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक का है।
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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में प्रवेश के नाम पर तकरीबन 7.37 करोड़ की वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच के आदेश जारी किए गए हैं। मामला वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक का है। शिकायतकर्ता ने मुक्त विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो.जीके द्विवेदी और उनके दो सहयोगियों पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए सीबीआई के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। सीबीआई के डायरेक्टर ने शिकायती पत्र उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को अग्रसारित कर दिया था और प्रमुख सचिव ने डीएम प्रयागराज को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। डीएम ने सीडीओ, एडीएम सिटी व डायट प्राचार्य की टीम गठित कर जांच शुरू करा दी है।

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शिकायतकर्ता कौशाम्बी निवासी आनंद कुमार ने सीबीआई को एक लिस्ट सौंपी है। उसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 से वर्ष 2019-20 तक यानी पांच वर्षों में मुक्त विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए बैंक चालान के माध्यम से एक अरब 64 करोड़ 78 लाख 43 हजार 157 रुपये और अंतिम प्रवेश के माध्यम से एक अरब 57 करोड़ 41 लाख 12 हजार 400 रुपये प्राप्त हुए।

बैंक चालान और अंतिम प्रवेश से प्राप्त धनराशि में सात करोड़ 37 लाख 30 हजार 757 रुपये का अंतर है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं कि बैंक चालान से जमा अतिरिक्त धनराशि आखिर कहां गई। शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराई गई लिस्ट के अनुसार पांच वर्षों में कुल 349153 बैंक चालान जेनरेट हुए और अंतिम रूप से 275254 प्रवेश हुए।

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शिकायतकर्ता का दावा है कि 2015 से 2019 के बीच मुक्त विवि में संचालित सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के पूर्व ऑनलाइन जेनरेट किए गए चालान व उनके सापेक्ष प्रवेश लेने वाले शिक्षार्थियों का डाटा विश्वविद्यालय में उपलब्ध है। इनके मिलान से इस आर्थिक अपराध को सत्यापित किया जा सकता है। ऑनलाइन प्रक्रिया में छेड़छाड़ की कोई गुजाइश नहीं। क्योंकि, डाटा प्रतिवर्ष प्रदेश सरकार व यूजीसी के पोर्टल पर भी अपलोड किया जाता है।

वित्त विभाग ने नहीं लगाई कोई आपत्ति: परीक्षा नियंत्रक

परीक्षा नियंत्रक प्रो.जीके द्विवेदी ने आरोपाें को निराधार बताते हुए कहा कि वह फरवरी 2010 से अप्रैल 2018 तक परीक्षा नियंत्रक रहे और दोबारा सितंबर-2025 से इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनकी जिम्मेदारी अभ्यर्थियों की योग्यता देख उन्हें प्रवेश देने तक सीमित है। प्रवेश से प्राप्त होने वाली फीस व प्रवेश लेने वाले शिक्षार्थियों की संख्या के बारे में हर साल वित्त विभाग को जानकारी उपलब्ध करा दी जाती है। चालान रसीद सीधे वित्त विभाग को भेज दी जाती है। सबकुछ ऑनलाइन है। इस संबंध में वित्त विभाग से उन्हें कभी कोई आपत्ति नहीं मिली और न ही किसी तरह की ऑडिट आपत्ति आई।
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