नागपुर के डॉ.प्रदीप शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक बैठने की वजह से यह बीमारी होने की संभावना रहती है। वहीं, बवासीर पर श्रीनगर से आए डॉ.निसार चौधरी ने बताया कि अगर लीवर में कोई समस्या है या फिर गर्भावस्था है तो बवासीर का ऑपरेशन नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान दवा से ही बवासीर का इलाज किया जाना बेहतर है। वहीं, लखनऊ से आए डॉ.अरशद अहमद ने बवासीर के ऑपरेशन की विधि के बारे में जानकारी दी।
मुंबई से डॉ. कुशल मित्तल मुंबई, डॉ.निरंजन अग्रवाल, जालंधर से डॉ.कमल गुप्ता व औरंगाबाद से डॉ.अतुल देश पांडेय ने व्याख्यान दिया। इस मौके पर डॉ. संतोष सिंह, डॉ. राजकुमार चौधरी, डॉ. कृष्णा सिंह, डॉ.अखिलेश यादव, डॉ.अशोक अग्रवाल, डॉ.सुजीत सिंह व डॉ.अभिनव अग्रवाल रहे। शनिवार सुबह सात बजे से शाम तीन बजे तक एमएलएन मेडिकल कॉलेज परिसर में फेलोशिप कोर्स की परीक्षा होगी। इसमें 43 चिकित्सक प्रतिभाग करेंगे।
बवासीर है कि कैंसर इसकी खून की जांच से जानकारी हो सकती है। क्योंकि,अक्सर देखा जाता है कि मरीज को इस संबंध में सही जानकारी नहीं हो पताी है। इस कारण स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे में मरीज को चाहिए कि वह इस समस्या को लेकर सर्जन से जरूर मिलें। - डॉ. प्रबाल नियोगी, प्रोफेसर, एमएलएन मेडिकल कॉलेज