डिप्टी सीएम ने बर्खास्त किए थे दो डॉक्टर
पिछले साल डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ऐसे ही बिना सूचना के गायब चल रहे दो चिकित्सकों को बर्खास्त किया था। जिसमें तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मिश्रा और कौड़िहार स्थित आनापुर महिला चिकित्सालय की चिकित्साधिकारी डॉ. श्रद्धा यादव है।
चिकित्सकों का है संकट
स्वास्थ्य विभाग में नियमित चिकित्सकों का अभाव काफी लंबे समय से है। हर सीएचसी में कम से कम पांच नियमित चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। स्वास्थ्य योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए पांच संविदा चिकित्सकों की भी तैनाती की जाती है। मगर, अधिकांश सीएचसी में नियमित डॉक्टर ही नहीं हैं। इससे मरीजों की कागजी भर्ती होती है। हकीकत में कोई इलाज नहीं मिल पाता।
यह हैं गैरहाजिर चिकित्सक
रामनगर: डॉ. रतिभान सिंह, डॉ. प्रभु प्रकाश, डॉ. विजय कुमार गुप्ता।
हंडिया: डॉ. नीलू मिश्रा, डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. रंकिता तिवारी
धनुपुर: डॉ. मोना तिवारी, डॉ. अविनाश जायसवाल।
शंकरगढ़: डॉ. सुमन मौर्य, डॉ. अदिति दुबे।
कौड़िहार: डॉ. श्रद्धा यादव, डॉ. ब्रजेश पटेल।
मेजा: डॉ. वीके चौधरी, डॉ. अनुराधा
मांडा: डॉ. बदरुज्जमा अंसारी, डॉ. अरविंद कुमार।
सैदाबाद: डॉ. रेखा देवी।
कौंधियारा: डॉ. प्रिया सिंह।
करछना: डॉ. विशाल रत्न श्रीवास्तव, डॉ. रवि पांडेय।
फूलपुर: डॉ. धनेश त्रिपाठी।
होलागढ़: डॉ. मरीशा।
कोटवा एट बनी: डॉ. प्रशांत कुमार त्रिपाठी।
सोरांव: डॉ. नेहा जायसवाल।
हथगहा: डॉ. शशांक पांडेय।
जिले के 25 सरकारी चिकित्सक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हैं। इनके घरों को कई नोटिस भी भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इन्हें बर्खास्त नहीं किए जाने के कारण नई नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। -डॉ. आशु पांडे, मुख्य चिकित्साधिकारी