शुद्ध पेयजल का अधिकार पाने के लिए संगम तट से शंखनाद की तैयारी है। इसे मौलिक अधिकार के तौर पर मान्यता दिलाने की मुहिम शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई में मकरसंक्रांति (15 जनवरी) को शुरू होगी। अभियान के पहले चरण में पूरे देश में जनजागरण, जनमत संग्रह और जल सभाएं आयोजित की जाएंगी।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के इस अभियान की कमान उनके उत्तराधिकारी शिष्य एवं गंगा सेवा अभियानम के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संभालेंगे। उनके मुताबिक शंकराचार्य का संकल्प है कि देशवासियों के लिए शुद्ध पेयजल को मौलिक अधिकार के रूप में विधि सम्मत शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जल को जीवन के अधिकार रूप में तो स्वीकार किया जाता है पर स्पष्ट रूप से मौलिक अधिकार के रूप में वर्णित नहीं है। हमें विकास के लिए सबसे पहले शुद्ध पेयजल का अधिकार चाहिए। बताया कि मौलिक अधिकार पाने की इस मुहिम में ‘नंदी’ संस्था (नेशनल एलायंस आफ एनजी ओस फॉर डेवलपमेंट एंड एनोवेशन) की ओर से पूरे देश में 108 जल सभाएं आयोजित की जाएंगी। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का आगमन 10 जनवरी को माघ मेला में होगा। शंकराचार्य के आने का कार्यक्रम उनके शिष्य एवं मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के पास आ गया है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य माघ मास के प्रमुख स्नानपर्व पर त्रिवेणी स्नान करेंगे।