हाथरस में हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पीड़िता के परिजनों से मिलने जा रहे तीन आरोपी पीएफआई सदस्यों की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र व प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। इन तीनों याचियों को हाथरस जाते समय मथुरा पुलिस ने पिछले वर्ष 5 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी से पूर्व यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट) की धारा 17 व 18 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए , 295-ए और 124-ए तथा आईटी एक्ट की धारा 65, 72, 75 के तहत इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। इन पर आरोप है कि ये लोग हाथरस कानून व्यवस्था खराब करने तथा जातीय दंगा भड़काने के उद्देश्य से वहां जा रहे थे।
यह आदेश जस्टिस एसपी केसरवानी तथा जस्टिस शमीम अहमद की खंडपीठ ने मुजफ्फरनगर के अतीकुर्रहमान, बहराइच के मसूद व रामपुर के आलम की तरफ से दायर याचिका पर दिया है। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 27 जनवरी तिथि नियत की है।
याचिका में मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके द्वारा उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। इन्होंने इस आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए जेल से अपनी रिहाई की मांग की है। इन पर आरोप है कि इनके पीएफआई छात्र विंग सीएफआई (कैंपस फ्रंटआफ इंडिया) से संबंध हैं।