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सिस्टम के आगे बेबस : बलात्कार पीड़िता नाबालिग मां को दो दिन बाद भी सिर्फ मिला आश्वासन

Fri, 29 Oct 2021 08:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र लिखे जाने के बावजूद नहीं मिली मदद, कलक्ट्रेट परिसर में दो दिन से लगा रही थी चक्कर। दो दिन बाद डीएम से मुलाकात हुई तो सिर्फ आश्वासन ही मिला। ग्राम सभा से लेकर कलेक्ट्रेट चक्कर काटने के बावजूद कुछ हासिल नहीं हुआ, जबकि सीएम कार्यालय से पत्र भी मिला है। 
 
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Prayagraj News : नवजात शिशु के साथ डीएम दफ्तार के सामने गुहार लगाने पहुंची पीड़िता। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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एक अधेड़ की वहशीपन का शिकार 14 वर्ष की बालिका अपने नवजात बच्चे के साथ दो दिनों से कलक्ट्रेट में भटक रही थी। बालिका और साथ में आए पिता की सूनी एवं डबडबाईं आंखें देखकर किसी का भी दिल पसीज जाता, लेकिन सरकारी सिस्टम पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

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दो दिन तक ठोकर खाने के बाद भी बालिका को सिर्फ आश्वासन मिला और सारी उम्मीदें अब फाइलों की रफ्तार पर टिक गईं हैं। उम्मीदें भी बस फौरी मदद को लेकर हैं। बालिका और बच्चे का भविष्य क्या होगा इसे लेकर प्रशासनिक आश्वासन भी नहीं मिला। यह स्थिति तब है जब पीड़िता के पास मुख्यमंत्री कार्यालय का पत्र भी है।

शंकरगढ़ की पीड़िता दो महीने के बच्चे के साथ बृहस्पतिवार को दिन भर कलक्ट्रेट परिसर में भटकती रही, लेकिन डीएम या अन्य किसी वरिष्ठ अफसर से मुलाकात नहीं हो सकी। शाम हो जाने पर कलक्ट्रेट के किसी कर्मचारी ने उनका आवेदन लिया, लेकिन इसके बाद किसी ने संपर्क नहीं किया। डीएम जनसुनवाई करके उठ न जाएं इसलिए एक मददगार के साथ पिता-बेटी सुबह छह बजे ही शंकरगढ़ से चल दिए।

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दो दिन के अथक प्रयास के बाद शुक्रवार को वह डीएम से मिलने में सफल रहे। डीएम ने जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्रा को बुला लिया, लेकिन उन्हें आश्वासन ही मिला। इसके बाद अमर उजाला कार्यालय पहुंची पीड़िता के पिता ने बताया कि पांच हजार रुपये की मदद दी गई। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने तीन लाख रुपये की मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन इसके लिए कागजी कार्रवाई पूरी होने तक इंतजार करना पड़ेगा। अन्य किसी तरह की मदद तथा बच्चे के भरण-पोषण को लेकर पीड़ित परिवार को कोई ठोस आश्वासन भी नहीं मिला।
 

 

क्या बोले जिलाधिकारी

डीएम संजय कुमार खत्री ने कहा कि ‘बालिका को महिला सम्मान कोष से तहत मदद दी जाएगी। जिला प्रोबेशन अधिकारी को इसकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है। बालिका एवं नवजात की और किस तरह से मदद की जा सकती है इसे देखा जा रहा है।’ आगे पढ़ें.. 55 वर्ष के पांच बच्चों के बाप ने की थी दरिंदगी...

55 वर्ष के पांच बच्चों के बाप ने की थी दरिंदगी
बलात्कार की शिकार शंकरगढ़ की बालिका के साथ गांव के 55 वर्षीय अधेड़ ने ही कुकृत्य किया था। बालिका के पिता मजदूर हैं और जंगल में झोपड़ी बनाकर रहते हैं। बालिका बकरी चराने गई थी और उसी दौरान गांव के ही अधेड़ ने उसके बलात्कार किया। इससे बालिका गर्भवती हो गई। पीड़िता के पिता के अनुसार आरोपी ने बालिका को जान से मारने की धमकी दी थी। इसलिए पीड़िता ने काफी दिनों तक इसकी जानकरी अपने परिवार वालों को नहीं दी।
 
पिता का कहना है कि गर्भ के दिन पर दिन बढ़ने के बाद सच्चाई सामने आई। इस बाबत पूछने पर बालिका ने पूरी बात बताई। इसके बाद भी आरोपी तथा उसके परिवारवालों ने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। पीड़िता के पिता का कहना है कि समझौता कराने में पुलिस विभाग के अफसर भी शामिल रहे, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। काफी प्रयास के बाद जून में मुकदमा लिखा गया, जबकि तब तक गर्भ ठहरे हुए करीब पांच महीने बीत गए थे।

अधिक दिन का गर्भ होने की वजह से डॉक्टरों ने गर्भपात कराने से भी मना कर दिया और चार सितंबर को बेटे का जन्म हुआ। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि आरोपी ने दो शादी की है। एक पत्नी का निधन हो चुका है। दोनों पत्नियों से उसके पांच बच्चे भी हैं और तीन की शादी हो गई है। इसके बावजूद उसका यह कृत्य सामने आने के बाद गांव के लोग हैरत में हैं। आगे पढ़ें...
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एक दर्जन से अधिक योजनाएं, लेकिन मदद नहीं
सरकार की एक दर्जन से अधिक कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन बलात्कार की पीड़ित बालिका को अभी तक किसी तरह की राहत नहीं मिल पाई है। पिता ने मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई। मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र भी लिखा गया। इसके बावजूद पीड़िता दर-दर भटक रही है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से सम्मान कोष बनाया गया है। इसके तहत तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है।
 
ऐसे में बच्चों के भरण पोषण के लिए भी योजना है, लेकिन उससे भी वह वंचित हैं। पीड़िता अनुसूचित जाति की है। समाज कल्याण विभाग की ओर से भी इनकी मदद के लिए योजना है, लेकिन इसका लाभ मिलना तो दूर इसे लेकर अभी तक आश्वासन भी नहीं मिला है। पीड़ित बालिका के पिता मजदूर हैं और उनके पास कोई जमीन नहीं है। जंगल में एक छोटे से भूखंड पर बनी झोपड़ी में उनका गुजर-बसर चलता है, लेकिन पीड़ित परिवार आवास, ग्राम समाज की जमीन समेत अन्य योजनाओं से वंचित है।
 
पीड़ित परिवार का अंत्योदय कार्ड भी नहीं बना है। हालांकि पात्र गृहस्थी कार्ड बना है। एसडीएम बारा की ओर से पीड़िता के पिता को ग्राम समाज की जमीन देने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन उसमें भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। इनके अलावा भी कई योजनाएं हैं, लेकिन पीड़ित परिवार तक कोई भी मदद नहीं पहुंची।
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