55 वर्ष के पांच बच्चों के बाप ने की थी दरिंदगी
बलात्कार की शिकार शंकरगढ़ की बालिका के साथ गांव के 55 वर्षीय अधेड़ ने ही कुकृत्य किया था। बालिका के पिता मजदूर हैं और जंगल में झोपड़ी बनाकर रहते हैं। बालिका बकरी चराने गई थी और उसी दौरान गांव के ही अधेड़ ने उसके बलात्कार किया। इससे बालिका गर्भवती हो गई। पीड़िता के पिता के अनुसार आरोपी ने बालिका को जान से मारने की धमकी दी थी। इसलिए पीड़िता ने काफी दिनों तक इसकी जानकरी अपने परिवार वालों को नहीं दी।
पिता का कहना है कि गर्भ के दिन पर दिन बढ़ने के बाद सच्चाई सामने आई। इस बाबत पूछने पर बालिका ने पूरी बात बताई। इसके बाद भी आरोपी तथा उसके परिवारवालों ने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। पीड़िता के पिता का कहना है कि समझौता कराने में पुलिस विभाग के अफसर भी शामिल रहे, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। काफी प्रयास के बाद जून में मुकदमा लिखा गया, जबकि तब तक गर्भ ठहरे हुए करीब पांच महीने बीत गए थे।
अधिक दिन का गर्भ होने की वजह से डॉक्टरों ने गर्भपात कराने से भी मना कर दिया और चार सितंबर को बेटे का जन्म हुआ। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि आरोपी ने दो शादी की है। एक पत्नी का निधन हो चुका है। दोनों पत्नियों से उसके पांच बच्चे भी हैं और तीन की शादी हो गई है। इसके बावजूद उसका यह कृत्य सामने आने के बाद गांव के लोग हैरत में हैं। आगे पढ़ें...
एक दर्जन से अधिक योजनाएं, लेकिन मदद नहीं
सरकार की एक दर्जन से अधिक कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन बलात्कार की पीड़ित बालिका को अभी तक किसी तरह की राहत नहीं मिल पाई है। पिता ने मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई। मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र भी लिखा गया। इसके बावजूद पीड़िता दर-दर भटक रही है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से सम्मान कोष बनाया गया है। इसके तहत तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है।
ऐसे में बच्चों के भरण पोषण के लिए भी योजना है, लेकिन उससे भी वह वंचित हैं। पीड़िता अनुसूचित जाति की है। समाज कल्याण विभाग की ओर से भी इनकी मदद के लिए योजना है, लेकिन इसका लाभ मिलना तो दूर इसे लेकर अभी तक आश्वासन भी नहीं मिला है। पीड़ित बालिका के पिता मजदूर हैं और उनके पास कोई जमीन नहीं है। जंगल में एक छोटे से भूखंड पर बनी झोपड़ी में उनका गुजर-बसर चलता है, लेकिन पीड़ित परिवार आवास, ग्राम समाज की जमीन समेत अन्य योजनाओं से वंचित है।
पीड़ित परिवार का अंत्योदय कार्ड भी नहीं बना है। हालांकि पात्र गृहस्थी कार्ड बना है। एसडीएम बारा की ओर से पीड़िता के पिता को ग्राम समाज की जमीन देने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन उसमें भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। इनके अलावा भी कई योजनाएं हैं, लेकिन पीड़ित परिवार तक कोई भी मदद नहीं पहुंची।