बता दें कि यूपी के शीर्ष अधिकारियों ने यह मांगे तब मानी हैं, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई और अधिवक्ताओं की शिकायतों को सुनने के लिए एक्टिंग जजों की अगुवाई में सात सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई। न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता की अगुवाई वाली यह कमेटी पीड़ित की शिकायतों पर सुनवाई करती।
कमेटी ने सुनवाई के लिए 16 सितंबर का समय भी निर्धारित कर दिया था। वह सुबह 11बजे बजे से घटना से जुड़े पीड़ितों की शिकायतों को सुनती। उसके पहले ही यूपी सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने इस मामले को हल करने के लिए बार कौंसिल के पदाधिकारी के साथ बैठक की। बार कौंसिल के अध्यक्ष के मुताबिक उनकी सभी मांगे मान ली गईं, जिसके बाद अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के निर्णय को वापस ले लिया गया।
इससे पहले हापुड़ में वकीलों पर लाठीचार्ज के खिलाफ आंदोलनरत अधिवक्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट, राजस्व परिषद, कैट सहित जिला और तहसीलों में दिन भर न्यायिक कार्य नहीं किया। यूपी सरकार का पुतला भी फूंका। हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने सुबह 10 बजे गेट नंबर चार और पांच को बंद करा दिया। फिर, गेट नंबर तीन पर प्रदर्शन कर यूपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
विरोध जताने वालों में एसोसिएशन महासचिव नितिन शर्मा, आशुतोष पांडेय, अशोक कुमार त्रिपाठी, अजय कुमार मिश्र, अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सर्वेश कुमार दुबे, अजय सिंह, अमरेंदु सिंह, आशीष कुमार मिश्र, अभ्युदय त्रिपाठी, विनोद राय, ओम प्रकाश विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे। उधर,
राजस्व परिषद बार एसोसिएशन की ओर से यूपी सरकार का पुतला फूंका गया। डीएम-एसपी के निलंबन की मांग दोहराई गई। पुतला जलाने वालों में अध्यक्ष हर्ष नारायण शर्मा, महासचिव पंकज कुमार श्रीवास्तव, एपी सिंह, सत्येंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, कल्याण उर्फ विजय शंकर तिवारी, हरिश्चंद्र सिंह, सुरेंद्र कुमार तिवारी, नवीन कुमार पांडेय, यादवेंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे।