कार्तिक चतुर्दशी बुधवार को राम भक्त हनुमानजी की जयंती श्रद्धा एवं उल्लासपूर्वक मनाई गई। फल, फूल, मेवों से हनुमान लला का मनोहारी शृंगार किया गया तो भजन संध्या मेें महिमा के गीत गूंजे। दर्शन और भोग के लिए मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। भोर से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव भव्य रूप से मनाया गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की देखरेख में 51 आचार्यों ने हनुमान जी का पंचामृत और दुग्धाभिषेक के बाद षोडसोेपचार पूजन किया। महंत नरेंद्र गिरि ने महाशृंगार आरती उतारी और छप्पन भोग अर्पित किया। इससे पहले व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि की अगुवाई में अनेक प्रकार के फूलों, फलों, मेवा और सोने-चांदी के आभूषणों से अनुपम शृंगार किया गया। अजय याज्ञनिक ने संगीतमय सुंदरकांड की प्रस्तुतियों से समां बांधा तो पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। निशान चढ़ाने के लिए भी नाचते-गाते हुए दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पूरा परिसर फूलों से सजा और देर रात तक प्रसाद बंटता रहा। भोर चार बजे विशेष पूजा के बाद गर्भगृह के कपाट भक्तों के लिए खुलेंगे।
सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन में प्रबंधक सच्चिदानंद मिश्र की देखरेख में सर्वांगरूप हनुमान सजे। षोडशोपचार पूजन, महाशृंगार के बाद भजनों से श्रद्धालुओं ने हनुमत महिमा बखानी। ऊंचा मंडी, बताशामंडी चौक स्थित सिद्धपीठ बाल स्वरूप हनुमान मंदिर में संयोजक प्रभात चौरसिया की देखरेख में जयंती समारोह पर हनुमान सजे। भक्तों ने सुंदरकांड पाठ और भजनों से महिमा बखानी।
बैरहना स्थित निम्बार्क आश्रम में दक्षिणामुखी हनुमान जी की खास पूजा और अनुष्ठान हुए। मनकामेश्वर मंदिर परिसर स्थित हनुमान मंदिर में दर्शन पूजन को भक्तों का तांता लगा। ललिता देवी मंदिर स्थित हनुमतदेव आकर्षक रूप में सजे। दारांगज स्थित हनुमान मंदिर, बरगदघाट, मीरापुर स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर, मनमोहन पार्क स्थित हनुमान मंदिर, हाईकोर्ट चौराहा स्थित हनुमान मंदिर, जगराम चौराहा स्थित हनुमान मंदिर, कटरा स्थित संकटमोचन मंदिर, गोविंदपुर स्थित हनुमान मंदिर, राजरूपपुर स्थित हनुमान मंदिर, सूबेदारगंज स्थित हनुमान मंदिर आदि में पूजन-अनुष्ठान, दर्शन को भीड़ उमड़ी। वहीं प्रयाग कागज कापी व्यवसायी कल्याण समिति के तत्वावधान में राधे परिवार की ओर से रामबाग स्थित कुंजबिहारी धर्मशाला में सामूहिक सुंदरकांड पाठ हुआ।