गन हाउस मालिक व कर्मचारी समेत चारों आरोपी भेजे गए जेल
पुलिस ने बिजली ठेकेदार पिस्टल सप्लायर की शुरू की तलाश
प्रयागराज। कारतूस की कालाबाजारी में पकड़ा गया गन हाउस मालिक व उसका कर्मचारी शनिवार को जेल भेज दिए गए। उधर पिस्टल संग पकड़े गए दोनों युवकों का भी चालान कर दिया गया। इससे पहले पूछताछ में दोनों ने बताया कि कालाबाजारी करने वाले उन्हें 200 रुपये में एक कारतूस देते थे।
बता दें कि एक दिन पहले कारतूस की कालाबाजारी में पुलिस ने शाहगंज स्थित ओंकार गन हाउस के मालिक अनिल कुमार साहू व उसके कर्मचारी वासिफ को गिरफ्तार किया था। दोनों की धरपकड़ पिस्टल संग पकड़े गए झलवा निवासी चक्रपाणि त्रिपाठी व भावेश द्विवेदी निवासी पीपलगांव झलवा से पूछताछ में मिली जानकारी के बाद की गई थी। जिन्हें पकड़ने में राजापुर चौकी प्रभारी धीरेंद्र सिंह का भी अहम रोल रहा। शनिवार को शाहगंज व कैंट पुलिस ने चारों का चालान कर दिया जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। उधर कैंट पुलिस का कहना है कि भावेश व चक्रपाणि ने पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां दीं। बताया कि वासिफ उन्हें 200 रुपये में एक कारतूस बेचता था।
जिसमें उसके साथ ही अनिल का भी हिस्सा होता था। बरामद 9 एमएम पिस्टल के बाबत भावेश ने बताया कि उसने मुंडेरा निवासी आजाद यादव से एक साल पहले इसे खरीदा था जो इस समय जेल में है। उधर चक्रपाणि ने बताया कि उसने बरामद हुई .32 बोर की पिस्टल दारागंज निवासी झब्बू लाल से खरीदा है। यह भी बताया कि झब्बू लाल बिजली ठेकेदार है। कैंट पुलिस ने बताया कि उसकी तलाश की जा रही है।
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संदीप मिश्रा, एसआई श्रवण निगम, राजीव तिवारी समेत अन्य ने एक दिन पहले पिस्टल के साथ दो युवकों को पकड़ा। दोनों ने अपना नाम झलवा निवासी भावेश द्विवेदी व चक्रपाणि त्रिपाठी बताया। इनके पास से काफी मात्रा में कारतूस भी मिले। हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई तो पता चला कि इन्हें कारतूस अतरसुइया के बैदन टोला निवासी वासिफ मुहैया कराता था। दोनों ने यह भी बताया कि शुक्रवार को भी वह उन्हें कुछ कारतूस देने आने वाला है। जिसके बाद पुलिस टीम ने शाहगंज में ही घेराबंदी की। कुछ देर बाद वासिफ वहां एक अन्य व्यक्ति के साथ पहुंचा जिसके बाद घेराबंदी में लगी टीम ने दोनों को पकड़ लिया। तलाशी में उनके पास से कुल 112 कारतूस मिले। जिनमें .32 के 102 व 315 बोर के 10 कारतूस शामिल थे। इतनी बड़ी मात्रा मेें कारतूस देख पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए।
पूछताछ में पता चला कि मौके से पकड़ा गया दूसरा व्यक्ति चकिया निवासी अनिल कुमार साहू है जो गन हाउस का मालिक है। उसकी दुकान शाहगंज में ओंकार गन हाउस के नाम से है। उधर वासिफ ने बताया कि वह वर्तमान में नुरुल्लाह रोड स्थित गन हाउस में काम करता है और वह लंबे समय से अनिल के भी संपर्क में था।
दुकान पर पहुंचे अफसर, स्टॉक का किया मिलान
वासिफ व मालिक अनिल से पूछताछ के बाद पुलिस को यह समझने में देर नहीं लगी कि मामला कारतूस की कालाबाजारी का है। उधर प्रकरण की जानकारी के बाद एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसीएम तृतीय दिनेश कुमार सिंह शाहगंज स्थित गन हाउस पर पहुंच गए। इस दौरान स्टॉक का मिलान करने पर वहां कारतूस कम पाए गए। जिसके बाद स्टॉक रजिस्टर व अन्य कागजात सीज कर दिए गए। एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जांच में यह बात सामने आई है कि गन हाउस से नियमविरुद्ध तरीके से कारतूस बेचे जा रहे थे। जिसके बाद रिकॉर्ड सीज कर दिए गए हैं।
गैंगस्टर समेत कई मामले हैं दर्ज
उधर पिस्टल संग पकड़े गए भावेश के बारे में पता चला कि गैंगस्टर की कार्रवाई के साथ ही कई मामलों में उसका नाम आ चुका है। जबकि चक्रपाणि ने बताया कि वह ट्रिपलआईटी चौराहे पर रेस्टोरेंट चलाता है। दोनों के पास से एक-एक पिस्टल बरामद हुई है। पुलिस के मुताबिक, पिस्टल के बाबत दोनों ने बताया कि उन्हें यह दारागंज निवासी झब्बू पाल उपलब्ध कराता था। लेकिन वह यह नहीं बता सके कि झब्बू पिस्टल कहां से लाता था। पुलिस ने बताया कि उसके बारे में पता लगाया जा रहा है।
पिछले साल भी पकड़ी गई थी गड़बड़ी
प्रयागराज। शाहगंज स्थित ओंकार गन हाउस में कारतूस बेचने में हेराफेरी का मामला पिछले साल भी पकड़ा गया था। एक अफसर ने बताया कि पिछले साल मार्च में होलागढ़ निवासी एक व्यक्ति के पास भारी मात्रा में कारतूस बरामद होने पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जांच के दौरान पता चला था कि शाहगंज स्थित ओंकार गन हाउस से भी उसने कारतूस लिए थे। जांच में पता चला था कि यहां से उसे नियमविरुद्ध तरीके से कारतूस बेचे गए थे। इस मामले में प्रशासनिक अफसरों को तत्कालीन सीओ रत्नेश सिंंह की ओर से रिपोर्ट भी भेजी गई थी।