उसके बाद उसे सीज कर लिया। बिलबुक, रजिस्टर से वहां बड़ी हेराफेरी पकड़ी गई। मौके पर ही फैक्टरी संचालक ने 35 लाख रुपये जमा कर दिए। हालांकि विभागीय टीम अभी सभी दस्तावेज की जांच कर रही है। बताया जा रहा कि वहां बड़े पैमाने पर जीएसटी के नाम पर हेराफेरी की गई। ऐसे में सारी जांच होने के बाद संबंधित फैक्टरी संचालक को 30 से 35 लाख रुपये और जमा करने पड़ सकते हैं। जांच अभियान में असिस्टेंट कमिश्नर राजन सिंह यादव, अभय पटेल, अवध कुमार, राजीव सिंह के साथ सचल दल की दो टीम गई। शाम पांच बजे तक कार्रवाई चली। इसके बाद सभी दस्तावेज लेकर टीम प्रयागराज वापस आ गई।