रेलवे ने ग्रुप सी श्रेणी में आने वाले सभी कर्मचारियों का वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (अपार) बनाया जाएगा। पहले ग्रेड-पे 1900 रुपये में आने वाले कर्मचारियों को इससे छूट दी गई थी। ‘अपार’ जारी होने से कर्मचारियों के सालाना इंक्रीमेंट और पदोन्नति में भी असर पड़ सकता है। रेलवे बोर्ड ने इसका आदेश जारी कर दिया है। इस बदलाव का असर उन श्रेणियों पर नहीं पड़ेगा जिनके ‘अपार’ पहले से लिखे जाते रहे हैं। साथ ही ग्रेड-पे 1800 रुपये वाले कर्मचारियों की वर्किंग रिपोर्ट लिखने की प्रथा जारी रहेगी।
ग्रेड-पे 1900 रुपये व पे-बैंड-1, 5200-20200 रुपये वाले को रेलवे के सन 1981 में जारी एक आदेश के तहत वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (अब वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट) से छूट दी गई थी। साथ ही ग्रेड-पे 1900 रुपये से अधिक लेकिन अगला उच्चतर ग्रेड एक नॉन सेलेक्शन ग्रेड हो, वाले कर्मचारी भी इससे बचे हुए थे। परंतु, इसे लेकर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण चंडीगढ़ और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में इसे लेकर वाद दायर हो गया। न्यायालय के निर्देश के बाद रेलवे बोर्ड ने पुराने आदेश के तहत छूट पाए सभी श्रेणी के कर्मचारियों का ‘अपार’ लिखने का फैसला किया। हालांकि, बाद में फिर इसमें संशोधन कर दिया गया। पूरे मामले को नए सिरे से रेलवे ने परिभाषित किया है।
रेलवे बोर्ड के कार्यपालक निदेशक स्थापना (अराजपत्रित) अरविंद कुमार ने एनसीआर समेत अन्य जोनों को भेजे आदेश में साफ किया है कि उन रेलकर्मियों के एपीएआर लिखने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है जिनकी एपीएआर पहले से लिखी जा रही है। यह बदलाव केवल छूटी हुई श्रेणियों के लिए है।