इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्वाचित महिला प्रधानों के कामकाज में उनके पतियों के हस्तक्षेप पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि प्रधानपति महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य को विफल कर रहे हैं। वह अपनी प्रधान पत्नियों का इस्तेमाल रबर स्टॉम्प की तरह कर रहे हैं। जबकि, उन्हें प्रधान के कार्यों में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।
इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने प्रयागराज शंकरगढ़ के पहाड़ी कला गांव के प्रधानपति पर प्रधान पत्नी के कामकाज में अनाधिकृत हस्तक्षेप करने और अधिकारियों द्वारा जांच में दखल देने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
शंकरगढ़ क्षेत्र के पहाड़ी कला गांव काके निवासी अधिवक्ता प्रवीण कुमार सिंह ने गांव में प्रधान द्वारा मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की जिलाधिकारी से शिकायत करने के साथ ही हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। कोर्ट के निर्देश पर डीएम में शिकायत की जांच कराई। नोडल अधिकारी की जांच के दौरान प्रधान पति धर्मेंद्र सिंह और शिकायतकर्ता प्रवीण सिंह के बीच विवाद मारपीट हो गई। प्रवीण सिंह ने प्रधान पति धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, तो धर्मेंद्र सिंह ने भी प्रवीण सिंह के खिलाफ क्रास मुकदमा दर्ज करवा दिया।