बाराबंकी में सरकारी ठेके से जहरीली शराब पीने से डेढ़ दर्जन लोगों की मौत के बाद अगर प्रयागराज में भी आबकारी महकमा सचेत नहीं हुआ तब यहां भी किसी अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में सरकारी ठेकों से ही नकली शराब बेची जा रही है, जिसकी धरपकड़ के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इसके अलावा अधिकांश कछारीय इलाकों में व्यापक पैमाने पर कच्ची शराब का भी उत्पादन धड़ल्ले से हो रहा जो कभी भी कहर बरपा सकती है।
कानपुर देहात में पिछले वर्ष घटी घटना के बाद यह लगातार दूसरी बड़ी घटना है जिसमें सरकारी ठेके से शराब पीने के बाद डेढ़ दर्जन लोगों की जान चली गई। सरकारी ठेके से शराब पीने के बाद कानपुर देहात में भी पिछले वर्ष दो दर्जन लोगों की मौत हुई थी। आबकारी सूत्रों का कहना है अधिक मुनाफा कमाने के लालच में सरकारी ठेके से नकली शराब बेची जाती है। यह नकली शराब एल्कोहल अथवा स्प्रिट में केमिकल आदि मिलाकर तैयार की जाती है, जो कई बार रिएक्शन से मेथिल एल्कोहल में तब्दील हो जाती है।
सरकारी ठेके से यही नकली शराब कम दाम में लोगों को बेंच दी जाती है। सरकारी ठेकों से मिलने के चलते शौकीन इसका बेधड़क सेवन ना शुरू देते हैं। प्रयागराज में भी चोरी छिपे कई सरकारी ठेकों से नकली शराब बेची जाती है। यह काम गांव-देहात के सरकारी ठेकों में अधिक होता है लेकिन इस बार कोई धर पकड़ अभी तक नहीं हुई। इनके अलावा कछारीय इलाकों में कच्ची शराब की भट्टियां भी लगातार धधक रही हैं। बहमलपुर, नींवा, बेली कछार, रम्मन का पुरवा, इब्राहिमपुर, सुजातगंज, करैली के यमुना पट्टी के इलाकों समेत कई इलाकों में नियमित तौर पर कच्ची शराब बनती है। आबकारी टीम कुछ महीनों के अंतराल में रस्म के तौर पर यहां पहुंचकर लहन, भट्टियां आदि नष्ट करती हैं लेकिन बनाने वालों की धरपकड़ न होने से कुछ दिनों बाद यह भट्टियां फिर धधकने लगती हैं।
नकली शराब बेंचने वालों पर निगाह रखी जाती है। अभी तक कहीं से भी शिकायत नहीं मिली जबकि पिछले वर्ष सात दुकानों को इस आरोप में निलंबित किया गया था। शिकायत मिलने पर उनके ठेके निरस्त किए जाएंगे।
-संदीप बिहारी मोडवेल, जिला आबकारी अधिकारी, प्रयागराज