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Prayagraj : बिक गई सरकारी जमीन, जांच रिपोर्ट के बाद भी छह महीने तक सोता रहा प्रशासन

Fri, 13 Sep 2024 01:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मिनहाजपुर की इस जमीन का 1888 में पट्टा हुआ था। तब, देश में अंग्रेजी हुकूमत हुआ करती थी। मिर्जापुर जिले के मुन्नू लाल ने अंग्रेजी सरकार से इस आधार पर जमीन का पट्टा करने का आग्रह किया कि वहां जरूरतमंदों के लिए धर्मशाला का निर्माण कराएंगे। यहां मारवाड़ी धर्मशाला का निर्माण हुआ भी, लेकिन कुछ दशक पहले से यहां व्यावसायिक गतिविधियां चलने लगीं।
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मिन्हाजपुर स्थित मारवाड़ी धर्मशाला परिसर में खुली दुकान। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मिनहाजपुर में मारवाड़ी धर्मशाला की सरकारी जमीन बिक गई और प्रशासन बेखबर ही बना रहा। यह तब, जबकि प्रशासन की ओर से कराई गई जांच में अवैध कब्जे और बैनामों की पुष्टि हो गई थी। इस पर अमर उजाला ने अफसरों से सवाल किए तो देरशाम एसडीएम ने इंस्पेक्टर को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देते हुए नायब तहसीलदार व लिपिक से स्पष्टीकरण मांग लिया।

मिनहाजपुर की इस जमीन का 1888 में पट्टा हुआ था। तब, देश में अंग्रेजी हुकूमत हुआ करती थी। मिर्जापुर जिले के मुन्नू लाल ने अंग्रेजी सरकार से इस आधार पर जमीन का पट्टा करने का आग्रह किया कि वहां जरूरतमंदों के लिए धर्मशाला का निर्माण कराएंगे। यहां मारवाड़ी धर्मशाला का निर्माण हुआ भी, लेकिन कुछ दशक पहले से यहां व्यावसायिक गतिविधियां चलने लगीं।

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पट्टे की यह शर्त थी कि यहां धर्मशाला के सिवाय और किसी चीज का निर्माण नहीं होगा, लेकिन यहां कब्जा जमाए लोगों ने न सिर्फ दुकानों का निर्माण कराया, बल्कि मनचाहे मकान और होटल तक बना लिए। हजारों-लाखों की हर महीने कमाई के हिस्सेदार कौन बने, यह कहना कठिन है, लेकिन जिला प्रशासन ने भी रोका-टोका किसी को नहीं नतीजतन, जमीन बिक गई, नए मकान भी बन गए।

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मिनहाजपुर स्थित मारवाड़ी धर्मशाला का जर्जर भवन। - फोटो : अमर उजाला।

भाइयों के झगड़े से हुई शिकायत

धर्मशाला की जमीन पर कब्जेदारी से खबरदार तो सभी थे, लेकिन साक्ष्यों के साथ पोल खोली तिरपाल का काम करने वाले कीडगंज निवासी राजू केशरवानी ने। दरअसल, दशकों तक राजू भी अपने बड़े भाई पप्पू केशरवानी के साथ वहीं किराये पर रहा करते थे। पप्पू ने मिर्जापुर निवासी कन्हैला लाल सिंहानिया, महेश कुमार सिंहानिया और विष्णु कुमार सिंहानिया से करीब 33 वर्गमीटर के प्लॉट का बैनामा करा लिया। फिर, छोटे भाई को घर से निकाल दिया। इससे आहत राजू ने भाई को सबक सिखाने की ठानी और जिलाधिकारी से लेकर हर उस चौखट पर शिकायत की, जहां से उसे न्याय की उम्मीद थी। जांच में इसकी पुष्टि भी हो गई कि यहां के होटल, दुकान-मकान का निर्माण और खरीद-फरोख्त, सब अवैध है। इनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई। मगर, कार्रवाई की नहीं गई।

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मिनहाजपुर स्थित मारवाड़ी धर्मशाला का जर्जर भवन। - फोटो : अमर उजाला।

अमर उजाला के सवाल पर सक्रिय हुआ प्रशासन

बृहस्पतिवार दोपहर अमर उजाला ने सरकारी जमीन का बैनामा हो जाने का सवाल किया तो प्रशासन सक्रिय हुआ। देर शाम एसडीएम सदर अभिषेक कुमार सिंह ने करैली इंस्पेक्टर को निर्देश दिया कि सरकारी जमीन खरीदने-बेचने वाले व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करें। उन्होंने सरकारी जमीन का बंदोबस्त देखने वाले नायब तहसीलदार अजय विक्रम सिंह और लिपिक रमाशंकर यादव से एक हफ्ते में स्पष्टीकरण तलब किया कि जांच रिपोर्ट मार्च में आ जाने के बावजूद इसे उनके समक्ष देरी से क्यों प्रस्तुत किया। एसडीएम ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव को पूरी जांच रिपोर्ट भेजते हुए अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई करके जिलाधिकारी को सूचित करने का आग्रह किया है।

राजकीय आस्थान की जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई, इसकी जांच कराएंगे। इस संबंध में एसडीएम सदर से रिपोर्ट मांगी है। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। -नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी

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