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High Court : मुआवजा दिए बिना काश्तकारों की भूमि पर दावा नहीं कर सकती सरकार, कोर्ट के आदेश से सरकार को झटका

Sat, 03 Jun 2023 04:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में प्रस्तावित ट्रांसपोर्टनगर के भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजा न पाने वाले काश्तकारों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि यूपी सरकार अवार्ड घोषित कर मुआवजा दिए बिना काश्तकारों की भूमि पर दावा कर उन्हें बेदखल नहीं कर सकती है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में प्रस्तावित ट्रांसपोर्टनगर के भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजा न पाने वाले काश्तकारों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि यूपी सरकार अवार्ड घोषित कर मुआवजा दिए बिना काश्तकारों की भूमि पर दावा कर उन्हें बेदखल नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि इन काश्तकारों का हक तब तक सुरक्षित बना रहेगा जब तक कि यूपी सरकार उनको उचित मुआवजा नहीं दे देती।

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इसके साथ ही कोर्ट ने करार नियमावली के तहत अवार्ड घोषित होने के बाद मुआवजा प्राप्त कर चुके काश्तकारों की याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने वाराणसी के ठाकुर प्रसाद व अन्य और हरिवंश पांडेय व अन्य की याचिका पर एक साथ फैसला सुनाते हुए दिया है।

मामले में वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से ट्रांसपोर्टनगर बसाया जाना है। जिसके लिए 25 जून 2001 को नोटिस जारी कर काश्तकारों से आपत्तियां मांगी गईं। प्राधिकरण ने परगना कसवर के चार गांवों कर्नाडाडी, विरवा, मिल्की चक, सराय मोहन में करीब 86.299 हेक्टेयर भूमि तय की। डीएम ने 27 अप्रैल 2011 को काश्तकारों के साथ बैठक कर 45.249 हेक्टेयर भूमि का अवार्ड घोषित कर 39 करोड़, 26 लाख, 76 हजार, 250 रुपये मुआवजा दिया और शेष भूमि पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसमें कुल चार सौ काश्तकारों ने मुआवजे की राशि दी गई।

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काश्तकारों ने इस अवार्ड और शेष भूमि पर कोई अवार्ड न घोषित करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने विकास प्राधिकरण सहित विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन उनकी सुनी नहीं गई। प्राधिकरण समस्त भूमि पर अपना दावा कर बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी। इस पर काश्तकारों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर भूमि अधिग्रहण की 2001 की अधिसूचना को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की। कहा था कि अधिग्रहीत की गई भूमि कृषि योग्य है। उसके अधिग्रहण की जरूरत नहीं है। वहां पहले से ही आवासीय मकान, पेड़ आदि मौजूद हैं।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि घोषित अवार्ड बहुत ही कम है। प्राधिकरण मामूली दर पर काश्तकारों की भूमि लेकर उसे कई गुना अधिक दामों पर बेचकर मुनाफा कमा रहा है। इसके अलावा मुआवजा पाने वालों की जो सूची कोर्ट में प्रस्तुत की गई। उसमें एक ही काश्तकारों के नाम कई बार हैं। साथ परिवार के अन्य सदस्यों के भी नाम जोड़े गए हैं। कुछ काश्तकारों को पूरी राशि भी नहीं मिली है।
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सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने कहा कि डीएम वाराणसी ने बाकी भूमि के अधिग्रहण के लिए शासन के समक्ष प्रस्ताव भेजा है। अभी इस मामले में शासन की स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद बची हुई भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई छह सप्ताह में शुरू की जाएगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली एयरटेक सर्विसेज प्राईवेट लिमिटेड के केस में दिए गए निर्णयों के आधार पर होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन काश्तकारों को अवार्ड घोषित होने के बाद मुआवजा नहीं मिल सका है या फिर जो अपेक्षित मुआवजा नहीं प्राप्त कर सके हैं। वे विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करेंगे। विशेष भूमि अधिकारी दो सप्ताह के भीतर उनके दावों का निस्तारण कर मुआवजा राशि उनके खाते में भेज देंगे।
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