शहर भर की सभी छोटी-बड़ी मस्जिदों के साथ चौक जामा मस्जिद, चक शिया जामा मस्जिद, रौशनबाग की शाह वसीउल्लाह मस्जिद में अहले इस्लाम के बाशिंदों ने बारगाहे खुदावंदी में अलविदा की खास नमाज के दौरान बारगाहे इलाही में सजदा किया।
मुकद्दस रमजान के आखिरी जुमा पर शुक्रवार को अलविदा की बाजमात नमाज के लिए शहर की मस्जिदों में अकीदतमंदों का रेला उमड़ पड़ा। पहली बार सड़कों पर अलविदा की नमाज के लिए अनुमति न मिलने की वजह से नमाजियों को को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मस्जिदों में जगह कम पड़ गई। कई मस्जिदों में छतों और सीढ़ियों पर भी नमाज अदा करानी पड़ी।
विज्ञापन
सड़कों पर बाजमात अलविदा की नमाज पर इस बार प्रशासन की सख्ती का असर साफ दिखा। अनुमति न मिलने की वजह से मुतवल्लियों और इमामों ने ही खुद आगे बढ़कर सड़कों पर नमाज न अदा करने के लिए लोगों को राजी किया। परंपरागत तरीके से सड़कों पर बाजमात नमाज की बजाए मस्जिदों में ही इमामों ने अलविदा की नमाज पढ़ाई।
शहर भर की सभी छोटी-बड़ी मस्जिदों के साथ चौक जामा मस्जिद, चक शिया जामा मस्जिद, रौशनबाग की शाह वसीउल्लाह मस्जिद में अहले इस्लाम के बाशिंदों ने बारगाहे खुदावंदी में अलविदा की खास नमाज के दौरान बारगाहे इलाही में सजदा किया। इके बाद पेश इमाम के पीछे खड़े हो कर बाजमात नमाज अदा की। चौक की जामा मस्जिद में न्यायालय और शासन -प्रशासन की गाइड लाइन पर अमल करते हुए इमाम रईस अख्तर हबीबी की कयादत में मस्जिद के अंदरुनी हिस्से में ही अलविदा की नमाज अदा की गई। वहीं शाह वसीउल्लाह की मस्जिद रौशनबाग में पेश इमाम मौलाना अहमद मकीन की कयादत में सैकड़ों लोगों ने एक पंक्ति में सजदा-ए-परवरदिगार किया।