लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने एक कदम और बढ़ाया है। सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी विद्यालयों की भांति अब यूपी बोर्ड के प्रदेशभर में 225 राजकीय इंटर कॉलेजों में लड़कों के साथ लड़कियां भी शिक्षा ग्रहण कर सकेंगी। सह शिक्षा के तहत यह व्यवस्था इसी शैक्षिक सत्र से लागू करने की तैयारी है। शासन में संयुक्त सचिव शत्रुंजय कुमार सिंह ने इस संबंध में शिक्षा निदेशक माध्यमिक को आदेश भी जारी कर दिया है।
लड़कियों की शिक्षा और लड़के-लड़कियों में भेदभाव न करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार संदेश देते रहते हैं। प्रदेश सरकार ने मोदी के इस संदेश को गंभीरता से लिया है। राजकीय इंटर कॉलेजों में लड़कियों को प्रवेश देने का एक कारण सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी के विद्यालय भी हैं। ऐसे ज्यादातर विद्यालयों में लड़के-लड़कियां साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, सो प्रदेश की योगी सरकार भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहती।इसी के तहत प्रदेश सरकार ने ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को शिक्षित करने के उद्देश्य से राजकीय इंटर कॉलेजों में सह शिक्षा व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया गया।
सरकार ने वर्तमान सामाजिक परिवेश एवं परिवर्तन के ध्यान में रखते हुए ही जीआईसी में भी लड़कियों के प्रवेश को अनुमति दी है। वैसे प्रदेश भर के 1505 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों (राजकीय हाईस्कूल) में पहले से लड़के-लड़कियां एक साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके साथ पूरे प्रदेश में 361 राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) भी हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
राजकीय इंटर कॉलेजों में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक भी तैनात हैं। इन कॉलेजों में लड़कियों का प्रवेश शुरू होने के बाद अलग से महिला शिक्षकों की नियुक्ति करने का भी झंझट नहीं होगा। जीआईसी इलाहाबाद के प्रधानाचार्य डीके सिंह ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि जीआईसी में लड़कियों का प्रवेश होने के बाद जरूरत पढ़ने पर महिला शिक्षिकाओं को क्लास टीचर की भी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
इलाहाबाद समेत कई जिलों के राजकीय इंटर कॉलेजों (जीआईसी) में अंग्रेजी माध्यम से भी पढ़ाई शुरू की गई है। लड़कियों को जीआईसी में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने पर वह चाहेंगी तो अंग्रेजी माध्यम से भी पढ़ाई कर सकेंगी, क्योंकि बड़ी संख्या ऐसे अभिभावकों की है जो अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से विद्यालयों में पढ़ाना तो चाहते हैं, लेकिन ऐसे विद्यालयों में पढ़ाई काफी महंगी होने के कारण वे मन मानकर रह जाते हैं। जीआईसी में छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिलाकर अभिभावक अब यह इच्छा पूरी कर सकेंगे। जीआईसी इलाहाबाद के प्रधानाचार्य डीके सिंह का कहना है कि इस वर्ष कक्षा छह, नौ एवं 11 में प्रवेश के लिए 3600 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। प्रवेश परीक्षा में जिनकी मेरिट अधिक होगी, उन्हें अंग्रेजी माध्यम की कक्षाओं में प्रवेश दिया जाएगा।