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गाजियाबाद : भूमि अधिग्रहण मामले में पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित

Thu, 16 Dec 2021 12:10 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की दो जजों की खंडपीठ कर रही है। कोर्ट केसामने अवार्ड की राशि के भुगतान को लेकर मामला विचाराधीन है। प्रतिवादी के अधिवक्ता चंदन शर्मा ने तर्क दिया कि काश्तकारों को मुआवजा दिए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने निर्देश जारी किए हैं।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock
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विस्तार
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गाजियाबाद में भूमि अधिग्रहण के मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। मामले में प्रदेश सरकार और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से दाखिल दो अलग-अलग पुनर्विचार याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। 

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मामले की सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की दो जजों की खंडपीठ कर रही है। कोर्ट केसामने अवार्ड की राशि के भुगतान को लेकर मामला विचाराधीन है। प्रतिवादी के अधिवक्ता चंदन शर्मा ने तर्क दिया कि काश्तकारों को मुआवजा दिए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने निर्देश जारी किए हैं।

यह मुआवजा नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत दिया जाना है। जबकि, याची गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता और महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने तर्क दिए गए कि भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम-2013 की धारा 113 के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देश को संसद से अनुमति नहीं मिली है।
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प्रतिवादी के अधिवक्ता ने कहा कि निर्देश केलिए संसद की अनुमति की कोई जरूरत नहीं है। मामले में पूर्व में दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादी के पक्ष में फैसला देते हुए अवार्ड की रकम को नए भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के अनुसार मुआवजा देने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी, लेकिन वहां याचिका खारिज कर दी गई। अब उसी मामले में राज्य सरकार और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण दोनों ने फिर हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। प्रतिवादी की मांग है कि उन्हें उनकी भूमि के लिए नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा दिया जाए। 

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