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जेन-जी के सवाल बने मुद्दा: हर दल मांगे इनका साथ, नई सियासत की प्रयोगशाला बना प्रयागराज; वामपंथी संगठन सक्रिय

Fri, 28 Aug 2026 11:43 AM IST
Sharukh Khan योगेश नारायण दीक्षित, अमर उजाला, प्रयागराज

सार

दिल्ली के आंदोलन के बाद जेन-जी बने सियासत में प्रयोगशाला बन गए हैं। अब हर दल जेन-जी का साथ चाहता है। वामपंथी संगठनों ने भी स्थानीय स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। पहले सपा, फिर कांग्रेस और अब लोजपा की प्रयागराज के युवाओं पर नजर है।
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Gen Z Politics - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जेन-जी के सवाल मुद्दा बन रहे हैं। सियासी दलों को उनमें वोट बैंक नजर आ रहा है। इनमें से कुछ पहली बार वोट डालेंगे तो तमाम ऐसे हैं जो शिक्षा और नौकरी पर खुली बहस कर माहौल गर्म किए हैं। पूर्वी यूपी से बिहार तक के ऐसे युवाओं का सबसे बड़ा केंद्र प्रयागराज है। इसीलिए जेन-जी वाली सियासत में संगमनगरी प्रयोगशाला बनती जा रही है।
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पढ़ने-लिखने और समझने वाले डेढ़ से दो लाख युवा एक साथ मिल जाएं तो कौन सियासी दल उन्हें समझाने और अपने से जोड़ने के लिए आगे नहीं आएगा। सबसे पहले करीब दो माह पूर्व यहां समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव प्रबुद्ध सम्मेलन (29 जून) के बहाने जेन-जी की सियासी नब्ज टटोलने आए। 
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इसके बाद आठ अगस्त को कांग्रेस के नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिये प्रयागराज के युवाओं और प्रतियोगी छात्रों से सीधा संवाद किया। अब बारी एनडीए के नेताओं की है। गठबंधन के घटक दल लोजपा (रामबिलास) के सांसद व केंद्रीय मंत्री तथा युवा चेहरे चिराग पासवान ने प्रयागराज के युवाओं के जरिये उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ी दस्तक की तैयारी की है। 

 

मध्य सितंबर में चिराग अपनी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के 'नव संकल्प महासभा' अभियान को प्रयागराज से शुरू करने वाले हैं। यूपी की राजनीति को नजदीक से देखने वाले वरिष्ठ विश्लेषक एस. हनुमंतराव इसे चुनावी राजनीति में प्रयागराज की बढ़ती ताकत मानते हैं। वह कहते हैं कि आजादी के आंदोलन के दौर से अब तक युवा राजनीति की शांतिपूर्ण आवाज उत्तर प्रदेश से ही बुलंद होती रही है।

चिराग की नजर जेन-जी पर
लोजपा के नेता चिराग पासवान बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय रहे थे। परिणाम आने पर उनका स्ट्राइक रेट सबसे बेहतर रहा था। इसके बाद वह युवाओं के मुद्दों पर मुखर होकर बोलते भी हैं और उनकी बातें नई पीढ़ी को पसंद आती हैं। इसीलिए उन्होंने उत्तर प्रदेश में अपने चुनाव अभियान की शुरुआत के लिए प्रयागराज को चुना है।

उनकी नजर जेन-जी पर है जो यहां दूर-दूर से आकर नौकरी के लिए परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनकी रैली की कमान भी जमुई से सांसद अरुण भारती को दी गई है जो खुद केंद्रीय विद्यालय से लेकर यूरोप तक पढ़ाई कर चुके हैं। अभी 50 साल के सांसद जेन-जी के मसलों पर चिराग के साथ काफी मुखर होकर बोलते रहे हैं।
 

सक्रिय हुए वामपंथी संगठन
दिल्ली के जंतर-मंतर से उठे जेन-जी के आंदोलन में वामपंथी छात्र संगठनों आइसा और एसएफआई के सदस्यों की भागीदारी चर्चा में रही थी। इससे प्रयागराज में वामपंथी छात्र संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।
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जेन-जी के तेवर देख एक ओर जहां आइसा के पुराने दिग्गज संगठन के नए सदस्यों को प्रेरित कर रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय औऱ डेलीगेसी में भी पैठ बढ़ाने के लिए उनके मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं। इविवि एक समय आइसा और एसएफआई का गढ़ था। इनके सदस्यों ने छात्रसंघ अध्यक्ष तक का चुनाव तक जीता था।
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