हालांकि इस दौरान शवों का अंतिम संस्कार यहां बंद करा दिया जाता है। छतनाग श्मशान घाट पर झूंसी के अलावां जौनपुर, प्रतापगढ़, हंडिया, गोपीगंज, ज्ञानपुर, बरौत, बादशाहपुर समेत कई शहरों से लोग शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। घाट के किनारे शव को जलाने के लिए लकडिय़ों की भी कई टाल हैं। इसके बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लोगों की भारी संख्या में हुई मौत के दौरान चंद पैसे बचाने के लिए मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। घाट पर मां गंगा की अविरल धारा से महज दो सौ मीटर दूर पर ही तकरीबन एक किलोमीटर की एरिया में सौ से ज्यादा लाशें बेखौफ दफनाई गई हैं। इससे छतनाग गांव समेत आसपास के लोग हतप्रभ हैं। ग्रामीणों ने शवों को दफनाए जाने पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है।