गंगा पूजन के साथ इस बार लगने वाले माघ मेले की तैयारियां जिला प्रशासन ने शुरू कर दीं। 1432 बीघे में तंबुओं की नगरी को बसाया जाएगा। मेले को पांच सेक्टरों में विभाजित किया गया है। सेक्टरों की देखभाल के लिए एक-एक सहायक प्रबंधक और पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे। शुक्रवार को यह जानकारी गंगा पूजन करते हुए डीएम संजय कुमार ने दी।
पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के लिए संगम घाट, अरैल स्नान घाट, रामघाट, दंडीबाड़ा, आचार्यबाड़ा घाट, दशाश्वमेध घाट, काली सड़क समेत नदी तटों पर स्नान घाटों का निर्माण कराया जाएगा। निगरानी के लिए सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे भी लगाए जाएंगे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए आर्मी, सीआरपीएफ, आरएएफ, पीएसी और पुलिस बल तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं के लिए रैन बसेरा भी बनाया जाएगा। मेला अवधि में गंगा और यमुना नदी को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए नाले के पानी को बायो रेमोडियल तकनीकी से शोधन कर ही बहाया जाएगा।
डीएम ने बताया कि माघ मेले में अनाधिकृत रूप से शिविर स्थापित करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्नानार्थियों को आवासीय व्यवस्था के लिए मेला प्रशासन द्वारा टिन शेड एवं विश्राम गृह बनाए जाएंगे। साथ ही मेला क्षेत्र में रात्रि 10 बजे से प्रात: चार बजे तक लाउडस्पीकर का इस्तेमाल वर्जित रहेगा। आकस्मिक स्थितियों में आवश्यक सूचना को प्रसारित करने के लिए यह बाध्यता नहीं रहेगी। डीएम ने इस दौरान नगर निगम और पॉवर कॉरपोरेशन के अधिकारियों को मेले की तैयारियों से संबंधित कई निर्देश भी दिए।
महत्वपूर्ण स्नानों पर उमड़ने वाली संभावित भीड़
पौष पूर्णिमा - 12 जनवरी - 50 लाख
मकर संक्रांति - 14 जनवरी - 65 लाख
मौनी अमावस्या - 27 जनवरी - 90 लाख
बसंत पंचमी - एक फरवरी - 60 लाख
माघी पूर्णिमा - 10 फरवरी - 45 लाख
महाशिवरात्रि - 24 फरवरी - सात लाख