सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता रहे एलएन श्रीवास्तव की पत्नी सीता श्रीवास्तव सूखे मेवे, कागज के अलावा नारियल और दफ्ती पर रंगों, धागों, सूखे मेवे के छिलकों और कलावा की मदद से गणेश की आकृतियां रचती हैं। गृहिणी के तौर पर घर में रहने वाली सीता बताती हैं कि करीब 16 साल पहले एक दिन घर पर पूजा के दौरान हाथ में बांधे जाने वाले कलावा (रक्षासूत्र) को देखकर गणेश की आकृति उकेरने की कल्पना मन में आई। फिर क्या था उन्होंने दो नारियल मंगाए। एक बड़ा और दूसरा छोटा।
कलावा की मदद से ही दोनों नारियलों पर उन्होंने गणपति की आकृति बना डाली। इसको परिवार के सदस्यों से लेकर पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने खूब सराहा। इसके बाद वह तरह-तरह के प्रयोग कर गणपति बनाने और लोगों को भेंट करने की मुहिम में जुट गईं।
सीता श्रीवास्तव के बनाए गणेश दुनिया के कई देशों में मंगलमूर्ति के रूप में सुख-समृद्धि प्रदान कर रहे हैं। वह बताती हैं कि टैगोर टाउन की उनकी सहेली इंदिरा स्वरूप के बेटे विकास स्वरूप को उन्होंने अपनी गणेश प्रतिमा भेंट की है। इनके अलावा कनाडा में कृष्णा शाही के पुत्र के अलावा विदेश में रहने वाली शशि जौहरी और शांति मिश्रा भी उनके गणपति को पूज रही हैं।
पिस्ता के छिलके से अम्मा बनातीं हैं गणेश की आंख
गणेशी अम्मा पिस्ता के छिलके से गणेश भगवान की आंख बनाती हैं। इसी तरह कागज से सूंड़ और चतुर्भुज रूप बनाकर तरह-तरह के रंग भरकर आकार देना उनका शौक है। उनके द्वाराबनाए गणपति हजारों घरों की शोभा बने हुए हैं।