भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की कर्मस्थली और इंदिरा गांधी की जन्म स्थली इलाहाबाद में भाजपा ने अपने पांव जमाने के लिए सबसे बड़ा पासा फेंक दिया है। नेहरू-गांधी परिवार के गढ़ में पूरी सरकार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिन की मौजूदगी ने कांग्रेसियों की नींद उड़ा दी है। इलाहाबाद से पूर्वांचल, अवध और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से को साधने की भाजपा की यह कोशिश आगामी विधानसभा चुनाव में नए समीकरण बनाने जा रही है। चंद्रशेखर आजाद, महादेवी वर्मा, मदनमोहन मालवीय जैसी महान विभूतियों के शहर में भाजपा का यह महाआयोजन उसे बड़े राजनीतिक लाभ की ओर ले जा सकता है। वैसे भी गंगा प्रदूषण को मुद्दा बनाने वाली भाजपा को यूपी में अपनी मजबूत शुरुआत के लिए संगम नगरी से बेहतर और कोई जगह नहीं मिल सकती थी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी में मजबूत शुरुआत और कांग्रेस को तगड़ा जवाब देने के लिए भाजपा ने इलाहाबाद को चुना। मार्च के महीने में इलाहाबाद आईं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी स्पष्ट संकेत दे गई थीं कि यूपी में उनकी पार्टी अपने चुनावी अभियान की शुरुआत 19 नवंबर को इंदिरा गांधी के जन्म शताब्दी समारोह के साथ करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को तैयारियां शुरू करने के लिए भी कह दिया था। ऐसे में भाजपा ने एक कदम आगे निकलकर यूपी में चुनावी अभियान की शुरुआत इलाहाबाद से करते हुए कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है और कांग्रेस की रात भी कठिन कर दी है। भाजपा की ओर से फेंका गया यह पासा अपना असर दिखाने लगा है। कांग्रेसी इस आयोजन को पचा नहीं पा रहे हैं और भाजपा के इस कार्यक्रम का विरोध करने वाले प्रतिद्वंद्वी दलों में वे सबसे आगे हैं।