अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि सर्किट के स्वरूप पर सीएम से करेंगे मुलाकात
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने द्वादश माधव सर्किट के निर्माण पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी को कई बार प्रस्ताव दे चुके हैं। फिर भी द्वादश माधव मंदिरों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत कष्टकारी है। माधव मंदिरों का जीर्णोद्धार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं चाहते हैं। अखाड़ा परिषद के सुझाव पर उन्होंने बजट पहले भी पास किया था। अब इस सर्किट के स्वरूप को लेकर वह मुख्यमंत्री से जल्द ही मुलाकात करेंगे।
द्वादश माधव की महिमा पौराणिक काल से
मान्यता है कि त्रेतायुग में महर्षि भारद्वाज के नेतृत्व में परिक्रमा होती थी। लेकिन, धीरे-धीरे परिक्रमा का दौर समाप्त हो गया। मुगल और अंग्रेजी शासनकाल में द्वादश माधव के मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया। देश को आजादी मिलने के बाद संत प्रभुदत्त ब्रह्माचारी ने भ्रमण करके द्वादश माधव की खोज की। फिर शंकराचार्य निरंजन देवतीर्थ ने धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के साथ 1961 में माघ मास में द्वादश माधव की परिक्रमा आरंभ कराई। संतों और भक्तों ने तीन दिन में परिक्रमा पूरी की।
संगम की रक्षा के लिए भगवान माधव ने किया था राक्षसों से युद्ध
पौराणिक मान्यता है कि प्रयागराज में संगम की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने द्वादश स्वरूप धारण किए थे। इनमें से कुछ मंदिर विलुप्त हो चुके हैं। मान्यता है कि भगवान माधव ने प्रयाग में अवतरित होकर गंगा, यमुना और सरस्वती को बचाने के लिए राक्षसों से युद्ध कर उनका वध किया था। बाद में राक्षसों से पवित्र संगम की रक्षा के लिए भगवान माधव 12 रूपों में प्रयागराज में विराजमान हुए। जिन्हें द्वादश माधव मंदिर के रूप में जाना जाता है।