श्रृंगवेरपुर में डॉ. संजय निषाद और सीएम योगी आदित्यनाथ।
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महाकुंभ की सफलता से उत्साहित भाजपा अब पूर्वी यूपी में पिछड़ा वोटबैंक को मजबूत करने की बिसात बिछाने लगी है। इसकी बानगी बृहस्पतिवार को शृंग्वेरपुर धाम में निषादराज की जयंती पर साफ दिखी। यूपी में यादव, कुर्मी के बाद तीसरे सबसे बड़े पिछड़ा वोट बैंक के रूप में निषाद, केवट, बिंद और मछुआरा समाज को भाजपा के साथ रोटी-बेटी के रिश्ते की तरह जोड़ने की कसमे खिलाई गईं।
जयंती पर सीएम योगी के आगे जिस तरह निषाद समाज के अलंबरदारों ने भाजपा के साथ कदमताल करने के कसमे-वादे किए, वह आने वाले वर्ष 2027 के यूपी के विधान सभा चुनाव के कील-कांटे अभी दुरुस्त करने का स्पष्ट संकेत दे रहे थे। मंत्री नरेंद्र कश्यप बार-बार सीएम योगी और पीएम मोदी को निषादों-नाविकों, मछुआरों का मसीहा तो बताते ही रहे, वह सीना ठोक कर दावा करते रहे कि अब निषाद कभी भी भाजपा को छोड़कर दूसरी जगह नहीं जाएंगे। इसके लिए निषाद समाज से कई बार हामी भी भरवाई गई।
वर्ष 2022 में भाजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने वाली निषाद पार्टी ने प्रयागराज की कई सीटों पर टिकट के लिए दावा किया था। लेकिन, निषाद पार्टी ने प्रयागराज की तीन सीटों पर अपने चुनाव चिह्न पर प्रत्याशी उतारने का दावा किया ठोका था। इन सीटों में यमुनापार की करछना, बारा और गंगापार की हंडिया विधानसभा सीटें शामिल हैं। इसमें हंडिया में निषाद पार्टी ने कड़ी टक्कर तो दी, लेकिन सपा के हाकिम चंद्र बिंद यहां से जीत गए।
इसी तरह करछना सीट पर निषाद पार्टी के पीयूष रंजन निषाद ने सपा के दिग्गज नेता उज्ज्वल रमण सिंह को हरा कर यहां से खाता खोलने में सफलता हासिल की थी। अब एक बार फिर सियासी गोट निषाद पार्टी को लेकर भाजपा अभी से बिछाने लगी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने निषादराज की जयंती पर जहां लोकलुभावन वादों से इस पिछड़े वर्ग का दिल जीतने की कोशिश की, वहीं उन्होंने साफ कहा कि भाजपा ही शृंग्वेरपुर के विकास से सनातन का वैभव जाग रहा है। इससे भगवान राम और निषादराज की मित्रता और प्रगाढ़ होगी ।