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Prayagraj: सत्तर के दशक में कोलकाता से लंदन के लिए प्रयागराज होते हुए जाती थी बस, 45 दिनों का था पूरा सफर

Thu, 16 Jul 2020 11:26 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : social media
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प्रयागराज में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो हवाई सफर द्वारा दिल्ली, मुंबई के रास्ते लंदन जा चुके हैं। लेकिन, एक समय ऐसा भी था, जब प्रयागराज से सड़क मार्ग द्वारा ही लंदन पहुंचा जा सकता था। सुनकर ताज्जुब होगा, लेकिन 50 से 70 के दशक में ऐसा होता था। उस दौरान कोलकाता से लंदन के लिए वाया प्रयागराज के रास्ते बस संचालित होती थी। अभी हाल ही में उस बस की कई पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल भी हुईं हैं। 

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prayagraj news - फोटो : social media
कोलकाता से लंदन के बीच इस बस सेवा को सिडनी की एक कंपनी एल्बर्ट टूर एंड ट्रेवल्स ने 1950 में शुरू की थी। इसका सफर 1973 तक जारी रहा। यानी की 47 वर्ष पूर्व ही इस बस का संचालन बंद हुआ है। बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस बस की और टिकट की फोटो वायरल हो रही हैं।

प्रयागराज के तमाम लोग इस बस की फोटो एवं टिकट को शेयर भी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि तब यह बस लंदन विक्टोरिया कोच स्टेशन से चलकर बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, पश्चिमी जर्मनी, यूगोस्लाविया, बुल्गारिया, तुर्की, ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान में रावलपिंडी, लाहौर के, भारत के दिल्ली, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी के रास्ते कोलकाता पहुंचती थी। तब यह सफर 45 दिन में पूरा होता था। 
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prayagraj news - फोटो : prayagraj

काफी महंगा था बस का किराया

वर्ष 1972 में कोलकाता से लेकर लंदन के लिए इस बस किराया 145 पाउंड था। बस के किराये में नाश्ता, खाना, रास्ते के होटलों में रुकने आदि का खर्च भी शामिल था। टिकट में उसका रूट, ठहरने का स्थान समेत कई जानकारियां होती थीं। इस बस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए स्लीपिंग बर्थ की सुविधा थी। बस में किताबें पढ़ने और बाहर का नजारा देखने के लिए एक खास बालकनी भी थी। इस बस सेवा में सैलून की सुविधा के साथ लाउंज, फैन, हीटर और रेडियो भी हुआ करता था। रास्ते में दिल्ली, इस्तांबुल समेत छह स्थानों पर यात्रियों को शॉपिंग करवाने के लिए भी बस रुका करती थी।

संगम दर्शन भी करते थे इस बस के यात्री

लंदन से आने वाली इस बस के यात्रियों को प्रयागराज में संगम का दर्शन भी करवाया जाता था। इसके पूर्व आगरा में ताजमहल दिखाने के बाद ही यह बस कोलकाता के लिए चलती थी। इस बस का पहला सफर 15 अप्रैल 1957 को शुरू हुआ, जो पांच जून को कोलकाता पहुंची।

45 दिन के इस सफर में ताजमहल के बाद संगम दर्शन और उसके बाद वाराणसी में गंगा के घाट आदि भी यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र होते थे। पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने इस बस को कभी देखा नहीं, लेकिन सोशल मीडिया में आने के बाद इसकी जानकारी जरूर मिल गई है। प्रयागराज के वीरेंद्र पाठक ने भी इस बस की तस्वीर सोशल मीडिया में साझा की।
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