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बाजार की कचौड़ी से महंगी प्रशासन की पूड़ी

Fri, 26 Aug 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। कटरा में कल्लू कचौड़ी की दुकान पर कचौड़ी के शौकीनों की दिनभर भीड़ जुटी रहती है। तीस रुपये में पांच कचौड़ी, दो तरह की सब्जी और रायता भी मिलता है लेकिन प्रशासन को छह सादी पूड़ी और एक सब्जी के लिए 46 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए पूड़ी, सब्जी बनाने वालों पर इतनी मेहरबानी क्यों, ये अफसर ही बेहतर बता सकते हैं लेकिन राहत केंद्रों में बंट रहे भोजन के पैकट के रेट पर सवाल उठने लगे हैं। 
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ठीक एक हफ्ते पहले रक्षाबंधन के दिन (18 अगस्त) बाढ़ राहत शिविरों में प्रशासन की ओर से भोजन कर वितरण शुरू  कया गया। शुरुआत में प्रति पैकेट 65 रुपये की दर से भुगतान हुआ लेकिन रेट पर सवाल उठने के बाद इसमें बदलाव का दिखावा किया गया। रेट घटाकर प्रति पैकेट 46 रुपये कर दिया गया। राहत शिविरों में अब भी इसी रेट पर भोजन के पैकेट का वितरण किया जा रहा है, जिसमें छह पूड़ियां और एक सब्जी होती है। राहत पैकेट तैयार करने वाले दुकानदारों के लिए यह फायदे का सौदा है। बाजार में इसके लिए उन्हें भले ही 20 से 30 रुपये मिलें लेकिन प्रशासन 46 रुपये दे रहा है। बाढ़ पीड़ितों के लिए शहर में छोटे-बड़े 17 राहत शिविर बनाए गए हैं। इनमें ढाई हजार शरणार्थी रह रहे हैं। ऋषिकुलम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अशोकनगर, एनी बेसेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज, महबूब अली इंटर मीडिएट कॉलेज, स्वामी विवेकानंद स्कूल अशोक नगर, उमराव सिंह सिंह हायर सेकेंड्री स्कूल मम्फोर्डगंज में बाढ़ पीड़ितों की संख्या सबसे अधिक है। 

शरणार्थियों के लिए रोजाना दर्जनों संस्थाएं खाने-पीने की सामग्री लेकर पहुंच रही हैं। इन शिविरों में तैनात कुछ कर्मचारियों ने बताया कि जितने शरणार्थी हैं, संस्थाओं और प्रशासन की ओर से उससे दोगुनी संख्या में पैकेट राहत केद्रों में भेजे जा रहे हैं। ऐसे में पैकेटों की बंदरबांट शुरू हो गई है। पैकेट के रेट निर्धारण का मसला हो या उनके वितरण की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी, जमकर घालमेल हो रहा है। फाइलों में तो वितरण हो रहा है लेकिन कई जरूरतमंदों को भूखे पेट रहना पड़ रहा है। ऋषिकुल बाढ़ राहत शिविर में रह रहे धीरेंद्र कुमार, संगीता, सुमन के का कहना है कि सुबह में नाश्ते में रोजाना बोरियों में आने वाली  खाद्य सामग्रियां (लाई, चना, गुण, बिस्किट) भी हर शरणार्थी को नहीं मिल पा रहीं।  एक-दो बोरियों का वितरण होता है और बाकी कहां जाती हैं, मालूम नहीं।
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रेट पर पल्ला झाड़ रहे अफसर
यह सही है कि राहत केंद्रों में बंट रहे भोजन के एक पैकेट का रेट 46 रुपये है लेकिन यह रेट किसने तय किया, इस पर अफसर पल्ला झाड़ रहे हैं। एसडीएम सदर बसंत अग्रवाल का कहना है कि तहसील प्रशासन सिर्फ प्रबंधन संभाल रहा है, भुगतान आपूर्ति विभाग को करना है। वहीं जिलापूर्ति अधिकारी केके सिंह का कहना है कि रेट के बारे में तहसील प्रशासन से पूछिए, आपूर्ति विभाग को सिर्फ वितरण की जिम्मेदारी दी गई है। 
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