याची की ओर से कहा गया कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया था। उसके खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी, उसकी ओर से विरोधियों के बेटे के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी का प्रतिवाद थी। उसने विरोधी के बेटे के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। न्यायालय ने कहा,हालांकि सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा बढ़ा दिया है लेकिन, यह नागरिकों को जिम्मेदारी के बिना बोलने का कोई अधिकार नहीं देता है। याची के खिलाफ संज्ञेय अपराध बन रहा है, लिहाजा, याचिका खारिज की जा रही है।