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फेसबुक से दोस्ती गांठकर ठगे साढ़े चौदह लाख

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Fourteen and a half million cheated by forging friendship with Facebook
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प्रयागराज। फेसबुक पर दोस्ती करने के बाद पैसा भेजने के नाम ठगी करने वाले विदेशी नागरिकों के गिरोह ने फिर एक प्रयागराजवासी को निशाना बना लिया। जालसाजों के फंदे में इस बार सिविल लाइंस निवासी एनके नरूला आ गए। उनको जालसाजों ने करीब 80 लाख रूपए नकद एवं गिफ्ट देने के बहाने साढ़े चौदह लाख रूपये ठग लिए। ठगी का अहसास होने पर भुक्तभोगी ने सिविल लाइंस थाने में अज्ञात महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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भुक्तभोगी एनके नरूला निवासी सिविल लाइंस ने पुलिस को बताया कि कुछ समय फेसबुक पर उनकी दोस्ती खुद को एमंडा स्मिथ बताने वाली युवती से हुई। उसने खुद को ब्रिटेन का बताया। इसी दौरान उनके घर में विवाह तय हो गया। यह बात उन्होंने एमंडा को बताई। एमांडा ने खुशी जताते हुए उपहार में कुछ रकम भेजने की बात कही। कुछ दिनों बाद एक व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ अमेरिका का कर्मचारी बताते हुए फोन किया। उसने 80 लाख रूपये भेजने की बात कहते हुए इस पर टैक्स देने की बात कही। इतनी बड़ी रकम की बात सुनकर नरूला टैक्स देने को राजी हो गए।
भुक्तभोगी के मुताबिक कुछ दिन जेम्स एम वेल्टर नामक व्यक्ति ने खुद को एंटी टेरिरस्ट सेल का सदस्य बताते हुए फोन किया और जांच के नाम पर फिर लाखों रूपये जमा करा दिए। इसके बाद दिल्ली से उनके पास फोन आया और भारी रकम आने एवं गिफ्ट छुड़ाने के नाम पर फिर पैसे जमा कराए गए। भुक्तभोगी के मुताबिक कुल 14.40 लाख रूपये जमा करा लिए गए लेकिन न पैसे का पता चला और न गिफ्ट का। इस पर उन्होंने एमांडा को फोन करना शुरू किया लेकिन उसका फोन बंद मिला। इस पर उनको फर्जीवाड़े का अहसास हो गया। उन्होंने क्राइम ब्रांच एसपी आशुतोष मिश्रा से मिलकर शिकायत दर्ज कराई। एसपी के निर्देश पर सिविल लाइंस पुलिस ने बुधवार को मामला दर्ज कर लिया। मामले की पड़ताल अब क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
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नाइजीरियन नागरिकों के हाथों में गिरोह
प्रयागराज। सोशल साईटस पर इस तरह के फर्जीवाड़े के पीछे नाइजीरियन नागरिकों के गिरोह का हाथ बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों ने दिल्ली को अपना ठिकाना बना रखा है और बेहद संगठित तरीके से इसका काम करते हैं। देश के कई महत्वपूर्ण इलाकों में इन लोगों ने अपने एजेंट बनाए हैं। इन एजेंटों के मार्फत धनी, प्रतिष्ठित लोगों के नाम पते एवं सोशल साइट्स एकांउट की जानकारी जुटाई जाती थी। उसके बाद फर्जी प्रोप्राइल के जरिए उनसे दोस्ती गांठी जाती। किसी न किसी बहाने उनको भारी रकम भिजवाने का लालच दिया जाता। भारी रकम मिलने के लालच में लोग जैसे ही तैयार होते, गिरोह के दूसरे देशों में बैठे सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। विदेशी नंबरों से लोगों को फोन कराया जाता है। इसके बाद भुक्तभोगी को पूरा विश्वास हो जाता है और इनके बिछाए जाल में वह असानी से फंसता जाता है। पिछले वर्ष दिल्ली में धरपकड़ के बाद इसी तरह के एक नाइजीरिएन गैंग का खुलासा हुआ था। प्रयागराज से एक सैन्यकर्मी भी इसी तरह फेसबुक से दोस्ती करने के बाद करीब 18 लाख रूपये गंवा चुका है।
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