अब तक 35 लाख रुपये से अधिक की ठगी
साइबर थाना प्रभारी राजीव तिवारी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि वह महाकुुंभ से मिलते-जुलते नामों से फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। इसके माध्यम से कम पैसों में लग्जरी रूम, वीआईपी स्नान व दर्शन कराने का लालच देकर एडवांस के तौर पर उनसे रकम लेते थे। अब तक 100 से अधिक लोगों को 35 से 36 लाख रुपये की चपत लगा चुके हैं। वहीं, पुलिस ठगी के 20 हजार रुपये होल्ड करा चुकी है।
चारों आरोपियों में किसकी क्या भूमिका
1-नालंदा जिले के चोरसुआ गांव निवासी पंकज शिक्षक था। यूट्यूब समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ठगी संबंधी कई वीडियो देखकर ठगने की योजना बनाता था। उसके बाद अन्य आरोपियों के संपर्क में आकर ठगी से मिलने वाले पैसों को निकलवाने का काम करता था।
2-वाराणसी के थाना चौबेपुर गांव मुरीदपुर निवासी यश चौबे (20) बीकॉम किए है। वाराणसी स्थित एक सॉफ्टवेयर कंपनी में वेबसाइट बनाने का काम करता है। आरोपी पंकज से संपर्क में आने के बाद महाकुंभ से संबंधित वेबसाइट के नामों को तलाशने के साथ ही डोमेन खरीदने का काम करता था। इसके लिए उसे मोटा कमीशन मिलता था।
3-वाराणसी के चौबेपुर थाने के कादीपुर छीतमपुर गांव निवासी अंकित गुप्ता (24) भी बीकॉम किए है। वाराणसी स्थित एक सॉफ्टवेयर कंपनी में वेबसाइट बनाने का काम करता है। इसका मुख्य काम फर्जी वेबसाइट तैयार करने के बाद महाकुंभ संबंधी पेज डिजाइन करना था। ताकि, किसी को ये न पता चले कि वेबसाइट फर्जी है।
4-आजमगढ़ के बर्दा थाने के गांव ठेकमा खुर्द लसड़ा निवासी अमन (29) ने बीए संग वेबसाइट डिप्लाेमा किए है। यह भी वाराणसी स्थित एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है। इसका मुख्य कार्य फर्जी वेबसाइट का प्रचार-प्रसार करना है। साथ ही ग्राहकों को बुकिंग आईडी व बिल देने का कार्य करता था।
अबतक 54 वेबसाइट को बंद करने का दावा
नवंबर माह में महाकुंभ में टेंट बुकिंग के नाम पर kumbhcottagebooking.com, kumbhcottagebooking.com, kumbhcottagebooking.com आदि वेबसाइट से ठगी की शिकायत मिलने पर साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। वहीं, अब साइबर पुलिस का दावा है कि फर्जी वेबसाइट से चल रहे ठगी के खेल को बंद कर दिया गया है। अब तक लगभग 54 वेबसाइट बंद की गई हैं।
आप इस तरह पहचानें फर्जी वेबसाइट
-यूआरएल की अच्छी तरह से जांच कर लें
-वेबसाइट का यूआरएल "https://" से शुरू हो रहा हो, लॉक आइकन हो।
-केवल सरकारी या प्रमाणित एजेंसियों से ही बुकिंग करें।
- वेबसाइट या व्हाट्सएप से मिले एपीके फाइल को डाउनलोड न करें।