फ्लाईओवर में फुटपाथ भी बनेगा
वहीं, दूसरी ओर मेडिकल चौराहे (सीएवी कॉलेज से केपी कॉलेज तक) पर रोजाना लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए एक दूसरे फ्लाईओवर की कुल लंबाई 884.57 मीटर और चौड़ाई 19.80 मीटर तय की गई है। इसमें 623.00 मीटर का वायाडक्ट (जिसमें हनुमान मंदिर/सिविल लाइन चौराहा साइड 431.50 मीटर और सीएवी कॉलेज साइड 191.50 मीटर का निर्माण होगा), 215.82 मीटर लंबी आरई वॉल और 45.75 मीटर मुख्य सेतु शामिल है।
स्थानीय और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए दोनों तरफ 1.50-1.50 मीटर चौड़े फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा सुरक्षा और आधुनिक मानकों के तहत 1770 मीटर व्यू कटर, आरसीसी ड्रेन, 89 विद्युतीकरण पोल और 1889.14 मीटर लंबी सर्विस रोड बनाई जाएगी, साथ ही बीएसएनएल व जल प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी पाइपलाइनों की यूटिलिटी शिफ्टिंग भी की जाएगी।
यह होगा फायदा
इन दोनों फ्लाईओवर के बन जाने से सिविल लाइंस चौराहा, सीएमपी कॉलेज, हाईकोर्ट, सुभाष चौराहा, मेडिकल चौराहा और संगम मार्ग के बीच वाहनों का घनत्व काफी कम हो जाएगा। हनुमान मंदिर चौराहे से बस अड्डे तक और सिविल लाइंस से संगम की ओर आने-जाने वाले वाहन बिना किसी रुकावट के सीधे निकल सकेंगे। इससे न केवल स्थानीय निवासियों, बल्कि हाईकोर्ट आने वाले वादकारियों, रोडवेज बस यात्रियों और संगम दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का समय और ईंधन दोनों बचेगा।
गोरखपुर के लिए खास
अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन मामले में गोरखपुर डीआईओएस तलब
गोरखपुर निवासी याची ने अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन की मांग करते हुए दायर की है याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन मामले में गोरखपुर डीआईओएस को तलब किया है। कोर्ट ने उन्हें 6 अक्तूबर 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत हलफनामा के साथ अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने डॉ. चंद्रशेखर दुबे की याचिका पर दिया है।
याची ने पूर्व में वेतन भुगतान के लिए याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने कार्यकारी प्रधानाचार्य के रूप में कार्य अवधि का वेतन शीघ्र भुगतान करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन न होने पर दाखिल अवमानना याचिका के बाद 12 मई 2026 को याची को वेतन का भुगतान कर दिया गया। इसके बाद जब याची ने अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन भुगतान का अनुरोध किया तो उसके दावे को खारिज कर दिया गया।
वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) की ओर से याची का दावा आगे भेजने पर वर्तमान कार्यकारी प्रधानाचार्य को ही अनुशासनहीनता की कार्रवाई की चेतावनी जारी कर दी गई। याची ने अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने डीआईओएस के कार्रवाई को प्रथम दृष्टया कानूनी दुर्भावना का मामला माना। साथ ही डीआईओएस को निर्देश दिया है कि वे 6 अक्तूबर 2026 को हाजिर हों।
उन्हें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि पूर्व में स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के आलोक में याची की पेंशन का दावा कैसे खारिज किया गया। साथ ही याची के दावा आगे भेजने पर प्रधानाचार्य को नोटिस कैसे जारी किया गया। अदालत ने चेतावनी भी दी है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है।
शाहजहांपुर के ध्यानार्थ
अल्प शिक्षित कर्मचारी की ओर से अपील दाखिल करने में हुई देरी नजरअंदाज करने योग्य
- 12 साल बाद अपील करने वाले सफाईकर्मी को हाईकोर्ट से राहत
- दंड का आदेश निरस्त, दोबारा सुनवाई के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अल्प शिक्षित कर्मचारी की ओर से अपील दाखिल करने में हुई देरी व लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने शाहजहांपुर निवासी राज कुमार की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने दंड के खिलाफ उसकी अपील को देरी के आधार पर खारिज करने वाले 26 जुलाई 2023 के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही अपीलीय प्राधिकारी को मामले में नए सिरे से आदेश पारित करने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार, याची के खिलाफ विभागीय जांच में तीन आरोप लगाए गए थे। जांच में दो आरोप साबित नहीं हुए। एक आरोप गांव कुआबोझ में नियमित सफाई नहीं करने से जुड़ा था। इसका खंडन करते हुए याची ने दावा किया था कि वह नियमित रूप से सफाई करता था। गांव के लोगों और ग्राम प्रधान ने भी उसके पक्ष में बयान दिया था। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में भी इस आरोप के साबित होने की कोई स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज नहीं था। इसके बावजूद 16 मई 2011 को याची की एक वेतनवृद्धि स्थायी रूप से रोकने और निंदा प्रविष्टि दर्ज करने का दंड दिया गया।
कोर्ट ने पाया कि याची ने करीब 12 साल दो महीने बाद नौ जुलाई 2023 को अपील दाखिल की। जिसे अपीलीय प्राधिकारी ने देरी और लापरवाही के आधार पर खारिज कर दिया था। समान मामले में मुन्नी देवी को हाईकोर्ट से राहत मिली थी। मुन्नी देवी ने भी करीब 12 साल आठ महीने बाद अपील की थी। कोर्ट ने अपीलीय प्राधिकारी को देरी को नजरअंदाज कर अपील का गुण-दोष के आधार पर फैसला करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उनकी रोकी गई वेतनवृद्धि बहाल कर दी गई थी।
लिहाजा, कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में भी जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोप साबित नहीं हुए थे। साथ ही याची चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (सफाईकर्मी) है। पर्याप्त शिक्षित नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अपील दाखिल करने में हुई देरी और लापरवाही को माफ किया जाना उचित है।