जिला अदालत ने 15 साल पहले हुई हत्या के आरोप से पिता-पुत्र समेत चार को दोषमुक्त कर दिया, लेकिन सभी को मारपीट के लिए दोषी ठहराया है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र शुक्ला की अदालत ने सुनाया है।
मामला प्रयागराज के घूरपुर के करमा बाजार का है। 14 जुलाई 2008 को मो.शमीम ने गांव के मो.बेचन, उसके बेटे मो.सलीम, इम्तियाज अहमद और मो.चांद बाबू के खिलाफ मारपीट की एनसीआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि वह सुबह शौच के लिए घर से निकला ही था कि आरोपियों ने लाठी, डंडे और बेल्ट से हमला बोल दिया। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे गांव के सरवर और मुश्ताक पर भी हमला किया गया। मारपीट के दौरान मुश्ताक के सिर में चोट आई। लोग उसे लेकर स्वरूपरानी अस्पताल जा ही रहे थे कि उसने रास्ते में दम तोड़ दिया।
पुलिस ने चारों आरोपियाें के खिलाफ मारपीट और गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। विवेचना के बाद सभी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। 15 साल चले ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से दस और बचाव पक्ष की ओर से छह गवाह पेश किए गए। ट्रायल में अभियोजन पक्ष मृतक मुश्ताक की मौका-ए-वारदात पर मौजूदगी साबित करने में विफल रहा।
लिहाजा, कोर्ट ने मो.बेचन, उसके बेटे मो.सलीम, इम्तियाज अहमद, और मो.चांद बाबू को मुश्ताक की हत्या के आरोप से बरी कर दिया। जबकि, मारपीट के मामले में दोषी करार देते हुए एक वर्ष की परिवीक्षा पर सशर्त रिहा करते हुए एक हफ्ते में 50 हजार की जमानत दाखिल करने का आदेश दिया है। इस राशि मे से जख्मी हुए शमीम और सरवर को एक-एक हजार रुपये प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा।