इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव, रविकांत यादव व दिनेश कांत यादव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याचीगण के आपराधिक इतिहास व अपराध के आरोप की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं है। याचीगण के खिलाफ आजमगढ़ में फूलपुर के गांधी आश्रम का ताला तोड़कर अवैध कब्जा करने और लूट करने का आरोप है। अग्रिम जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति राजुल भार्गव ने सुनवाई की।
घटना की प्राथमिकी में कहा गया है कि वाकया 26 सितंबर 19 की शाम का है। याची का कहना था कि उसे राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। उसने अपनी जमीन पर कब्जा किया है। जबकि सरकारी वकील का कहना था कि 1977 से अब तक याची के खिलाफ 47 धोखाधड़ी, लूट, हत्या, दुराचार, लोक संपत्ति के नुकसान के आपराधिक मामले दर्ज हैं।
एक मामले में सजा हो चुकी है। महीनों तक जेल में रहे हैं। डीएम ने जांच कर गांधी आश्रम का अवैध कब्जा खाली करा लिया है और जमीन पर आश्रम का नाम दर्ज है। आश्रम विश्व बैंक की मदद से बना है। जिसपर याचीगण ने कब्जा कर लिया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है।