बार-बार अर्जी पेश करने पर विधायक के वकील ने उठाई आपत्ति
विधायक विजमा यादव के अधिवक्ता ने संशोधन प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह प्रार्थना पत्र कालबाधित हो चुका है। हालांकि, यह उनका दूसरा प्रार्थना पत्र है, जो पोषणीय नहीं है। बार-बार एक ही तरह के प्रार्थना पत्र सिर्फ निर्वाचित विधायक को परेशान करने और याचिका को लंबे समय तक लंबित रखने के उद्देश्य से दाखिल किए जा रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि याची की ओर से पेश संशोधन की अर्जी चुनाव याचिका में पहले से ही लगाए गए उनके आरोपों के समर्थन में पेश दस्तावेज हैं, इसलिए इसे कालबाधित अर्जी नहीं माना जा सकता। हालांकि, बार-बार पेश की जा रही इस तरह की अर्जी से विपक्षी विधायक को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याची पूर्व मंत्री के संशोधन प्रार्थना पत्र को दस हजार रुपये के हर्जाने के साथ स्वीकार कर लिया। यह हर्जाना पूर्व मंत्री को विधायक विजमा यादव को एक हफ्ते के भीतर अदा करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी।