उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई को प्रदेश सरकार से अभियोजन स्वीकृति मिलने का इंतजार है, ताकि भर्तियों में धांधली के लिए जिम्मेदार लोगों पर सीधी कार्रवाई की सके। इस मामले में अब पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और समाजसेवी नूतन ठाकुर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई को तत्काल अभियोजन स्वीकृति देने की मांग की है।
पीसीएस-2015, एपीएस-2010 सहित आयोग की कई भर्तियों में गड़बड़ी सामने आने पर सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। आयोग के कुछ वर्तमान और पूर्व कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए सीबीआई ने दिसंबर 2020 में शासन को पत्र भेजकर अभियोजन स्वीकृति मांगी थी, लेकिन सीबीआई का पत्र पांच माह बाद भी शासन में ही अटका हुआ है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और समाजसेवी नूतन ठाकुर ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि आपने अभियोजन स्वीकृति के प्रकरण पर विशेष बल देते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सभी जांच एजेंसियों के प्रमुखों की एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई है और निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में विलंबतम 60 दिनों के अंदर निर्णय अवश्य ले लिया जाए, लेकिन इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भर्ती घोटाले के आरोपियों को बचाया जा रहा है और सीबीआई को अब तक अभियोजन स्वीकृति नहीं दी गई है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल अभियोजन स्वीकृति देने की मांग की है।