अपनी प्रतिभा को अपना मित्र बनाएं युवा : रामभद्राचार्य
युवा कोई अवस्था नहीं हैं, बल्कि मनुष्य को मिली एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें वह अपने जीवन के सारे कार्य पूर्ण कर सकता है। बस युवाओं को अपना लक्ष्य तय करने और उसी के अनुसार कार्य करने की जरूरत है। उक्त बातें मेजारोड में चल रही सात दिवसीय रामकथा के पांचवें दिन पद्मभूषण स्वामी रामभद्राचार्य ने युवाओं को प्रेरणा देते हुए कही।
उन्हाेंने भगवान राम के कई प्रसंगों का गान करते हुए युवाओं को सफलता के मार्ग भी सुझाए। मेजारोड दिव्यांगोत्थान श्रीराम सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित रामकथा के पांचवें दिन जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि भगवान राम ने अपने जन्म के बारहवें दिन ही अपना लक्ष्य तय कर लिया था। भगवान राम ने युवावस्था में ही अपने लक्ष्य को पूरा कर लिया था। इसके उन्होंने युवाओं को सफलता का मार्ग बताते हुए कहा कि सभी युवक और युवती अपनी प्रतिभा को ही अपना मित्र बनाएं। क्योंकि खुद की प्रतिभा ही एक ऐसी साथी होती है जो कभी धोखा नहीं दे सकती।
उसी के साथ निष्ठा से कार्य करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करें। पांचवें दिन की कथा में पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, पूर्व मंत्री उज्जवल रमण सिंह, उच्च न्यायालय के अपर महाधिवक्ता महेशचंद्र द्विवेदी, बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एवं सदस्य देवेंद्र मिश्र नगरहा, वरिष्ठ अधिवक्ता गौरीशंकर चतुर्वेदी, समाजसेवी जय शुक्ला आदि लोगों ने भी रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लिया। वहीं आयोजन समिति के तनय पांडेय और अभिषेक तिवारी उर्फ टिंकू और गौरव पांडेय द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। राजू पांडेय, विनय पांडेय, गिरीश दूबे, बाबा उपेंद्र सिंह आदि लोग भी कथा की व्यवस्थाओं में जुटे रहे।