एक तरफ पूरा देश सोमवार को बापू को श्रद्धांजलि दे रहा था तो इलाहाबाद में जिला प्रशासन बापू को भूल गया। परंपरा के विपरीत न तो कलक्ट्रेट में सायरन बजा और न ही किसी अफसर को इस बारे में कुछ याद रहा। यहां तक कि कलक्ट्रेट में सीआरओ ऑफिस के सामने पार्क में बनी महात्मा गांधी की प्रतिमा पर किसी ने माल्यार्पण नहीं किया।
यह परंपरा रही है कि 30 जनवरी को महात्मा गंाधी की पुण्यतिथि पर कलक्ट्रेट में बरगद के पेड़ के नीचे जिला प्रशासन की ओर से सायरन बजवाया जाता है। सायरन की आवास विकास भवन, कचहरी समेत आसपास स्थित इलाकों में तक पहुंचती है। सायरन बजते ही जो जहां मौजूद रहता है, वहीं खड़े होकर दो मिनट का मौन रखकर बापू को श्रद्धांजलि देता है। प्रशासन ने सायरन बजाने की जिम्मेदारी सिविल डिफेंस को सौंप रखी है। सोमवार को बापू की पुण्यतिथि पर सायरन नहीं बजा। कलक्ट्रेट, विकास भवन में कर्मचारियों और जनपद न्यायालय में वकीलों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा।
सबके मन में सवाल उठते रहे कि सायरन क्यों नहीं बजा? कहीं इसकी वजह चुनाव आचार संहिता तो नहीं? इस बात से भी लोग हैरत में रहे कि कलक्ट्रेट के भीतर स्थित बापू की प्रतिमा पर किसी ने माल्यार्पण तक नहीं किया। अगर नामांकन के दौरान सुरक्षा कारणों से आम लोगों की कलक्ट्रेट में इंट्री बंद थी तो वहां मौजूद अफसरों ने गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण क्यों नहीं किया। सायरन तो सिर्फ एक व्यक्ति को बजाना था, बाकी लोगों को तो आवाज सुनकर श्रद्धांजलि देने के लिए सिर्फ दो मिनट के लिए मौन हो जाना था।
‘सायरन न बजने की वजह चुनाव आचार संहिता नहीं है। दरअसल, नामांकन के कारण कलक्ट्रेट परिसर में चुनाव से जुड़े अफसरों, कर्मचारियों, सुरक्षा बलों के अतिरिक्त अन्य लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। ऐसा सुरक्षा कारणों से किया गया है। ऐसे में सायरन बजाकर कलक्ट्रेट परिसर में एक जगह भीड़ इकट्ठा नहीं की जा सकती थी। सबने अलग-अलग जगह कार्यक्रम आयोजित कर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की है।’ संजय कुमार, जिलाधिकारी