प्रयागराज। कुंभ को लेकर चल रहे निर्माण कार्यों में गड़बड़ी पर सवाल उठने बंद नहीं हुए हैं। तमाम विपक्षी दलों द्वारा कुंभ के निर्माण में गड़बड़ियों को मुद्दा बनाए जाने के बाद अब विशेषज्ञ भी सवाल उठाने लगे हैं। उनका मानना है कि जिस तेजी से काम हो रहा है, उसमें सड़कों का स्लोप बनाने, गिट्टी और डामर के मिक्चर में मानकों की अनदेखी की जा रही है। हालांकि खुले तौर पर सभी बोलने से बच रहे हैं लेकिन, उनका कहना है कि यही हाल रहा तो एक बारिश के बाद ही गुणवत्ता के दावों की सच्चाई सामने आ जाएगी।
शहर में पीडब्ल्यूडी, एडीए और नगर निगम द्वारा सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। रातों रात बनाई जा रही सड़कों की असलियत सुबह दिखती है। सड़कें ऊंची-नीची बनी हैं और स्लोप (ढलान) का अभाव भी साफ दिखता है। जिन सड़कों का चौड़ीकरण किया गया है, वहां डामरीकरण (ब्लैक टॉप) के बाद गाड़ियां हिचकोले खा रही हैं। जानकार बताते हैं कि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (एमओआरटीएच) के मानकों के मुताबिक सड़कें बनाई जाएं तो सालों साल चलेंगी। मगर जिस तरह से काम हो रहा है, उसकी निगरानी न की गई तो पानी पड़ते ही सड़कें उखड़ने लगेंगी।
पुराने शहर में नगर निगम 72 प्रस्तावित सड़कों में 30 से ज्यादा बनवा चुका है। इसमें पीडब्ल्यूडी के मानक के मुताबिक काम कराने के दावे हैं, हकीकत यह है कि सड़क निर्माण में एमओआरटीएच के मानकों को दरकिनार किया गया है। सड़कें एसडीबीसी और बीएम फार्मूले पर बनाई गई हैं, जबकि काम नई तकनीक के तहत बीसी (बिटुमिनस कांक्रीट) और डीबीएम ( डेंस बिटुमिनस मैकेडम) से बनाई जानी चाहिए। कई स्थानों पर सड़कों की गिट्टियां उखड़ने लगी हैं।
कुंभ के लिए शहर में सर्वाधिक सड़कें बनाने की जिम्मेदारी एडीए के पास है। करीब 40 सड़कों में अधिकांश का चौड़ीकरण किया गया है। अभी तक जीएसबी( मोटी गिट्टी) फिर छोटी गिट्टी (डब्ल्यूएमएम) के बाद अधिकांश पर एक कोट ब्लैक टॉप करने का काम तेजी पर है। रामबाग, लीडर रोड स्टैनली रोड, कमला नेहरू रोड समेत अन्य सड़कों पर गड्ढों से तो मुक्ति मिली लेकिन, गिट्टियों के बीच में गैप और गाड़ियों का झटका लेना संदेह उत्पन्न करता है।
पीडब्ल्यूडी भी यही कर रहा है। कचहरी के सामने वाली सड़क रातों रात बना दी। पुरानी जीटी रोड का काम इसी विभाग के जिम्मे है। कचहरी के सामने एक लेयर में बनाई गई सड़क की खामियां चलने वाले रोज गिनाते हैं। नगर विकास मंत्री के स्पष्ट निर्देश के बाद पीडब्ल्यूडी फुटपाथ पर हाथ ही नहीं लगा रहा है। इससे सड़कें ऊंची और पटरी नीचे होने से पैदल राहगीरों के साथ दो पहिया वाहन सवार हादसों का शिकार हो रहे हैं। यही कारण है कि जो सड़कें बनी हैं, उनको देखकर सांसदों के साथ आम लोग सवाल उठा रहे हैं।