1989 में बृजमोहन एक दिन अपने घर से निकले तो फिर वापस नहीं लौटे। फिर, उनका कुछ पता नहीं चला। इस बीच अतीक विधायक बन गया था। उसने एक दिन बृजमोहन की पत्नी सूरजकली को बुलाया और कहा कि वह जमीन भूल जाय। उसके परिवार के जीवन का भर खर्च अब मैं उठाऊंगा। सूरजकली समझ गईं कि उनके पति को अतीक ने ही गायब कराया है। वह थाने गईं। पूरी बात बताई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कहा गया कि बृजमोहन को ढूंढ लिया जाएगा। सूरजकली अतीक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ती रहीं, लेकिन न बृजमोहन मिले न ही अतीक के खिलाफ कार्रवाई हुई। शांत कराने के लिए उनके भाई को भी करंट लगाया गया।
सूरजकली का बेटा बड़ा हुआ तो वह अपनी जमीन बचाने के लिए और पिता की खोजबीन की लड़ाई लड़ने लगा। 2016 में सूरजकली के बेटे को गोली मार दी गई। अतीक के गुर्गों ने झलवा स्थित घर पर भी कई बार चढ़कर सूरजकली और उसके बेटे को धमकाया, लेकिन सूरजकली ने कभी हार नहीं मानी। शनिवार की रात अतीक और अशरफ की हत्या के बाद सूरजकली ने सालों बाद राहत की सांस जरूर ली, लेकिन पूरी तरह से चैन अब भी नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि अतीक-अशरफ मर गए, लेकिन उनके गुर्गे अभी भी जिंदा हैं। सूरजकली ने सरकार से न्याय दिलाने के साथ-साथ परिवार वालों को सुरक्षा देने की मांग की है।