Prayagraj: People cross a flooded road with water of River Ganga to take holydip in Sangam on the occasion of Rakshabandhan festival in Prayagraj (Allahabad) on Thursday, August 15, 2019.
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प्रयागराज। माताटीला, लाचूरा व बरियारपुर बांधों से करीब 7.32 लाख क्यूसेक से प्रति सेकेंड से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद प्रयागराज में अगले 24 घंटे के भीतर बाढ़ आ सकती है। कुछ घंटों बाद कछारी इलाकों के जलमग्न होने की आशंका को देखते हुए वृहस्पतिवार की शाम जिला प्रशासन ने एलर्ट जारी कर दिया। गंगा-यमुना के कछारी इलाकों को तत्काल खाली कराने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की देर रात तक तैयारी की जाती रही। राहत व बचाव के लिए नावों और बाढ़ चौकियों की स्थापना के भी निर्देश दिए गए, ताकि बाढ़ से घिरने के बाद लोगों को निकाल कर राहत कैंपों में पहुंचाया जा सके।
पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की बेतवा, केन और थसान नदियों में भारी उफान के बाद प्रयागराज में बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। प्रशासन का कहना है कि शुक्रवार की शाम तक गंगा-यमुना खतरे के निशान तक पहुंच सकती हैं। बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिले के सभी उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को एलर्ट जारी कर दिया गया है। सिंचाई बाढ़ खंड के एक्सईएन ने बताया कि माताटीला बांध से 4,30,000 क्यूसेक लाचूरा बांध से थसान नदी में 84,400 क्यूसेक व बरियारपुर बांध से केन नदी में 2,18000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से भारी जल राशि गंगा-यमुना में पहुंचने की बात कही जा रही है। शाम चार बजे की बुलेटिन के मुताबिक बेतवा केजलस्तर में 41 सेंमी प्रति घंटा और यमुना के जस्तर में 25 सेंमी प्रतिघंटा की वृद्धि शुरू हो गई है। बांदा में केन का जलस्तर बढ़कर 102.04 मीटर पहुंच गया है। केन-बेतवा के जरिए यमुना में बड़ी जलराशि के आने का सिलसिला देर रात शुरू हो गया। फिलहाल रात आठ बजे फाफामऊ व छतनाग में गंगा क्रमश: 78.69 व 76.93 मीटर पर बह रही थी। जबकि यमुना का ज स्तर 77. 53मीटर रिकार्ड किया गया। इन दोनों के खतरे का निशान 84. 734 मीटर है। एडीएम वित्त/राजस्व ने एसडीएम, तहसीलदारों के अलावा कानूनगो को बाढ़ राहत के लिए पर्याप्त नावें मंगाने और डूब क्षेत्रों को खाली कराने का निर्देश दिया है।
तटीय इलाकों का निरीक्षण
प्रयागराज। माता टील बांध से बेतवा नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। इससे यमुना नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी की संभावना है। इसके मद्देनजर बाढ़ की आशंका को देखते हुए तटीय इलाके में एलर्ट जारी किया गया है। जिला प्रशासन के लोगों ने शुक्रवार को क्षेत्र का निरीक्षण भी किया।
एसडीएम सदर गौरव रंजन श्रीवास्तव एवं तहसीलदार अरविंद कुमार मिश्र के साथ एनडीआरएफ की टीम ने बाढ़ सम्भावित क्षेत्र मऊ कछार, द्रोपदी घाट, बक्शीबांध, छोटा बघाड़ा, बलुआघाट, चाचर नाला व गोस नगर का दौरा किया। अफसरों ने वहां स्थापित बाढ़ चौकियों को एलर्ट किया। अफसरों का कहना है कि पानी धीरे-धीरे बढ़ेगा। इसलिए खतरे की कोई बात नहीं है। यदि पानी बहुत बढ़ता है तो लोगों को आसपास के स्कूलों में रखा जाएगा। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की एक टीम भी करेली स्थित लेखपाल ट्रेनिंग स्कूल में कैंप कर रही है।