कोर्ट ने कहा कि याची ने खुद स्वीकार किया है कि भूमि प्रबंधन कमेटी ने उसके पिता को साल दर साल कुल पांच साल के लिए खाता संख्या 616 में अंकित गाटा बंदोबस्त के तहत 30 जून 1971 को पट्टा प्रदान किया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम के तहत भूमि प्रबंधन कमेटी द्वारा पांच साल के लिए आवंटित पट्टे को संक्रमणीय भूमि में तब्दील करने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जब पट्टा पांच साल के लिए ही हुआ है तो याची को उसका मालिक नहीं बनाया जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने फेंकू लाल पाल गौतम की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि याची ने खुद स्वीकार किया है कि भूमि प्रबंधन कमेटी ने उसके पिता को साल दर साल कुल पांच साल के लिए खाता संख्या 616 में अंकित गाटा बंदोबस्त के तहत 30 जून 1971 को पट्टा प्रदान किया था। याची के पिता की मौत हो गई। याची का उस पर 37 साल तक कब्जा बना रहा। अब यह भूमि ग्राम सभा की बचत भूमि श्रेणी तीन में शामिल कर दी गई है। पट्टा की अवधि को बढ़ाया नहीं जा सकता है।
इससे पहले याची ने मामले को गोरखपुर चकबंदी अधिकारी के समक्ष आवेदन देकर इस भूमि को संक्रमणीय घोषित करने और उसके स्थानांतरण का अधिकार दिए जाने की मांग की थी। चकबंदी अधिकारी ने इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चकबंदी अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। उसका आदेश सही है। लिहाजा, याचिका खारिज की जाती है।