इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका खारिज होने के बाद वही याचिका दुबारा दाखिल कर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर याची पर पांच हजार रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए हर्जाना राशि एक माह में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने का निर्देश दिया है। इससे पूर्व कोर्ट ने याची पर 50 हजार हर्जाना लगाया था, किन्तु याची के महिला होने के आधार पर इसे कम करने की प्रार्थना पर हर्जाने की राशि घटाकर पांच हजार रुपये कर दी।
यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने गुड्डी की एक ही मुद्दे पर दुबारा याचिका दाखिल करने पर दिया है।
याची की भूमि का अधिग्रहण 2011में किया गया था।अवार्ड से असंतुष्ट याची ने याचिका दाखिल कर मुआवजा बढ़ाने की मांग की। कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि याची के पास रिफरेन्स दाखिल करने का विकल्प मौजूद है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
इसके बावजूद इसी प्रार्थना को लेकर दुबारा याचिका दाखिल कर दी गई। जिस पर कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए हर्जाने के साथ याचिका खारिज कर दी। हालांकि सरकारी अधिवक्ता ने हर्जाने की राशि 50 हजार रुपये से कम करने का विरोध करते हुए कहा कि याचिका पर याची का पति राम गोपाल पैरोकार है।किन्तु कोर्ट ने हर्जाना घटाकर पांच हजार रुपये कर दिया है।