इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के सीनेट परिसर में 28 जुलाई को हुए प्रदर्शन, नारेबाजी और कथित तोड़फोड़ के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कर्नलगंज थाने में पांच नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में शामिल चार छात्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है। सभी निलंबित छात्रों को पांच अगस्त को अपने अभिभावकों के साथ विश्वविद्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
विश्वविद्यालय के मुख्य कुलानुशासक (चीफ प्रॉक्टर) प्रो. अतुल नारायण सिंह की तहरीर पर दर्ज एफआईआर के अनुसार 28 जुलाई को कुछ छात्र और एक बाहरी युवक सीनेट परिसर में प्रवेश कर विरोध प्रदर्शन करने लगे। आरोप है कि इस दौरान नारेबाजी, धक्का-मुक्की और परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर बीए द्वितीय वर्ष के छात्र आयुष यादव, एमए द्वितीय वर्ष के आशुतोष मौर्य, एमए तृतीय वर्ष के गौरव कुमार, बीए तृतीय वर्ष के अमित यादव और रीवा (मध्य प्रदेश) निवासी प्रियांशु भुरतिया को नामजद किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रियांशु भुरतिया विश्वविद्यालय का छात्र नहीं है।
छात्र संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी
- छात्र संगठनों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। छात्र नेता अनुराग यादव ने कहा कि वह फीस वृद्धि और सीटों में कटौती जैसे मुद्दों पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें उठा रहे थे। प्रशासन ने वार्ता के बजाय दंडात्मक कार्रवाई की है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सीनेट परिसर में 28 जुलाई को हुई नारेबाजी, प्रदर्शन और तोड़फोड़ के मामले में कर्नलगंज थाने में पांच नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आशुतोष मौर्य, आयुष यादव, अमित यादव, गौरव कुमार और प्रियांशु भुरतिया को नामजद किया गया है। इन सभी के परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध है। प्रियांशु भुरतिया विश्वविद्यालय का छात्र नहीं है। -प्रो. जया कपूर, पीआरओ, इलाहाबाद विश्वविद्यालय