माघ मेला होने में अब सिर्फ दो महीने ही शेष हैं, लेकिन तैयारियों के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं दिख रहा है। नौ दिन के भीतर मंगलवार को दूसरी बार पांटून पुलों के टेंडर से फर्मों ने किनारा कर लिया। चार पांटून पुलों के लिए पीडब्ल्यूडी के अफसर इंतजार करते रहे,लेकिन एक भी टेंडर नहीं डाले गए। बृहस्पतिवार को चकर्ड प्लेट सड़कों के लिए टेंडर कराया जाना है, लेकिन फर्मों ने माघ मेले के ऐसे कार्यों के टेंडर के बहिष्कार का एलान कर दिया है।
गंगा पर बनने वाले पांटून पुलों के लिए बुधवार को निविदा होनी थी, लेकिन समयावधि बीत गई लेकिन टेंडर ही नहीं डाला जा सका। इससे निर्माण कार्यों में देरी और गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है। संगम की रेती पर कल्पवालियों, संतों और भक्तों के समागम के इस सबसे बड़े सांस्कृतिक मेले की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। संगम की रेती पर इस बार भी पांच सेक्टर में माघ मेला बसाने का प्रस्ताव है। इसके लिए सड़क, बिजली, पेयजल, सफाई, सुरक्षा और चिकित्सा इंतजामों के लिए अगस्त से ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाती रही है।