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प्रयागराज : माघ मेला के पांटून पुलों के टेंडर से फिर फर्मों ने किया किनारा

Thu, 10 Nov 2022 12:40 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

गंगा पर बनने वाले पांटून पुलों के लिए बुधवार को निविदा होनी थी, लेकिन समयावधि बीत गई लेकिन टेंडर ही नहीं डाला जा सका। इससे निर्माण कार्यों में देरी और गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है।
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पांटून पुल। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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माघ मेला होने में अब सिर्फ दो महीने ही शेष हैं, लेकिन तैयारियों के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं दिख रहा है। नौ दिन के भीतर मंगलवार को दूसरी बार पांटून पुलों के टेंडर से फर्मों ने किनारा कर लिया। चार पांटून पुलों के लिए पीडब्ल्यूडी के अफसर इंतजार करते रहे,लेकिन एक भी टेंडर नहीं डाले गए। बृहस्पतिवार को चकर्ड प्लेट सड़कों के लिए टेंडर कराया जाना है, लेकिन फर्मों ने माघ मेले के ऐसे कार्यों के टेंडर के बहिष्कार का एलान कर दिया है।

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गंगा पर बनने वाले पांटून पुलों के लिए बुधवार को निविदा होनी थी, लेकिन समयावधि बीत गई लेकिन टेंडर ही नहीं डाला जा सका। इससे निर्माण कार्यों में देरी और गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है। संगम की रेती पर कल्पवालियों, संतों और भक्तों के समागम के इस सबसे बड़े सांस्कृतिक मेले की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। संगम की रेती पर इस बार भी पांच सेक्टर में माघ मेला बसाने का प्रस्ताव है। इसके लिए सड़क, बिजली, पेयजल, सफाई, सुरक्षा और चिकित्सा इंतजामों के लिए अगस्त से ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाती रही है।

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इस बार जल स्तर अधिक होने की वजह से मेला बसाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक पेच निविदा न हो पाने को लेकर है। पिछले मेले के कार्यों का भुगतान न होने से नाराज ठेकेदारों ने बुधवार को भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया। 43 लाख की लागत वाले काली पांटून पुल, 42 लाख की लागत वाले त्रिवेणी पांटून पुल 40 लाख की लागत वाले गंगोली शिवाला और 44 लाख की लागत वाले ओल्ड जीटी पांटून पुलों की निविदा के लिए कोई आगे नहीं आया।


इससे पहले एक नवंबर को 40 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित महावीर पांटून पुल के लिए सिर्फ एक निविदा डाली गई थी। इसी तरह चकर्ड प्लेट सड़कों, का निर्माण के लिए बृहस्पतिवार को फिर निविदा कराई जानी है, लेकिन ठेकेदारों का कहना है कि वह इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने स्वीकार किया कि माघ मेला के लिए आमंत्रित निविदाओं में फर्मों ने हिस्सा नहीं लिया है। ऐसे में पांटून पुलों के लिए फिर से टेंडर कराया जाएगा।


पिछले माघ मेले के पांटून पुलों और चकर्ड प्लेट सड़कों के निर्माण का एक रुपये भी अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा जिले में अन्य सड़कों के कार्यों का बी भुगतान नहीं हो रहा है। इसलिए निविदा में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया गया है। इसके विरोध में 11 नवंबर को लखनऊ में प्रदर्शन किया जाएगा। - सुदामा सिंह, अध्यक्ष ठेकेदार कल्याण समिति। 
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