इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही की सजा किसानों को नहीं दी जा सकती। केंद्र पर गेहूं खरीद के बाद ऑनलाइन एंट्री न करना अधिकारियों की लापरवाही है। प्रादेशिक को-ऑपरेटिव फेडरेशन व संबंधित अधिकारी किसानों का बकाया एक माह में भुगतान कराएं।
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने श्रवण कुमार व सात अन्य की याचिका पर दिया है। मऊ के लाखीपुर स्थित पीसीएफ गेहूं क्रय केंद्र पर रबी विपणन वर्ष 2021-22 में आठ स्थानीय किसानों ने 1975 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 206 क्विंटल गेहूं बेचा था। क्रय केंद्र प्रभारी ने किसानों को गेहूं प्राप्ति की रसीदें तो जारी कर दीं, लेकिन पोर्टल पर फीडिंग नहीं की। इससे भुगतान नहीं हुआ।
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किसानों ने शिकायत दर्ज कराई तो जांच में सामने आया कि केंद्र प्रभारी ने फीडिंग नहीं की और धनराशि का गबन कर लिया। केंद्र प्रभारी के खिलाफ मऊ के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई और उसे निलंबित कर दिया गया। किसानों ने गेहूं के मूल्य का भुगतान न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
राज्य सरकार और पीसीएफ के वकीलों ने दलील दी कि हस्तलिखित रसीदों के आधार पर भुगतान नहीं किया जा सकता। जब तक जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक राज्य पर भुगतान की जिम्मेदारी नहीं बनती। हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसानों ने अपना अनाज सरकारी क्रय केंद्र पर जमा कर रसीद हासिल कर ली तो पोर्टल पर एंट्री न होना प्रशासनिक और संस्थागत विफलता है।